झूलेलाल जयंती सिन्धी समुदाय का एक प्रमुख धार्मिक पर्व है। इसे भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। झूलेलाल को उडेरोलाल भी कहा जाता है और वे सिन्धियों के संरक्षक देवता माने जाते हैं। यह पर्व धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
झूलेलाल जयंती चैत्र माह की शुक्ल द्वादशी (चेटी चण्ड) को मनाई जाती है।
2026 में झूलेलाल जयंती: 20 मार्च, शुक्रवार
मुहूर्त: शाम 06:32 बजे से 07:59 बजे तक
प्रतिपदा तिथि: 19 मार्च सुबह 06:52 बजे से 20 मार्च सुबह 04:52 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त - 04:50 ए एम से 05:38 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 05:14 ए एम से 06:25 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 12:05 पी एम से 12:53 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:30 पी एम से 03:18 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 06:30 पी एम से 06:54 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 06:32 पी एम से 07:43 पी एम
अमृत काल - 12:13 ए एम, 21 मार्च से 01:43 ए एम, 21 मार्च
निशिता मुहूर्त - 12:04 ए एम, 21 मार्च से 12:52 ए एम, 21 मार्च
सर्वार्थ सिद्धि योग - पूरे दिन
अमृत सिद्धि योग - 06:25 ए एम से 02:27 ए एम, 21 मार्च
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भगवान झूलेलाल वरुण देव के अवतार माने जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, सिन्धी हिन्दू मिरखशाह नामक शासक के अत्याचारों से परेशान थे। उनके लिए वरुण देव ने एक दिव्य शिशु का जन्म कराया, जिसे भगवान झूलेलाल के रूप में पूजा जाने लगा। वे समाज में शांति, सुरक्षा और भक्ति के प्रतीक हैं।
यह पर्व भगवान झूलेलाल के जन्म और उनके द्वारा किए गए चमत्कारों की याद में मनाया जाता है। सिन्धी समुदाय ने मिरखशाह के अत्याचार से बचने के लिए वरुण देव से प्रार्थना की थी और उनके आशीर्वाद से भगवान झूलेलाल का जन्म हुआ। इस दिन धार्मिक स्वतंत्रता, समाज की सुरक्षा और नई जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
इस प्रकार, झूलेलाल जयंती सिन्धी समाज के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है।