झारखंड डीजीपी नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, झारखंड सरकार और तदाशा मिश्रा को नोटिस

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय की है। इस मामले में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और अखिल भारतीय आदिम जनजाति विकास समिति ने याचिकाएं दाखिल की थीं। अब केंद्र सरकार ने भी याचिका दायर कर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को अवैध घोषित करने की मांग की है। केंद्र का आरोप है कि झारखंड सरकार ने 2025 में DGP चयन और नियुक्ति के लिए जो नियम बनाए, वे प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ हैं।
केंद्र ने झारखंड सरकार के नियमों पर उठाए सवाल
केंद्र सरकार का कहना है कि झारखंड सरकार ने 2025 में DGP के चयन और नियुक्ति के लिए जो नियम बनाए, वे प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दिए गए निर्देशों के अनुरूप नहीं हैं। केंद्र ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने नए नियम बनाते समय सुप्रीम कोर्ट से अनुमति नहीं ली। मामले में झारखंड सरकार को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है।
ये भी पढ़ें: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए हाईकोर्ट पहुंचा यूथ कांग्रेस, 9 अक्टूबर को सुनवाई
तदाशा मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने DGP तदाशा मिश्रा को भी नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि उनका पक्ष सुने बिना उन्हें पद से हटाने का फैसला नहीं लिया जा सकता। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय की है।
पिछली दो DGP नियुक्तियों पर भी सवाल
केंद्र सरकार ने झारखंड में हुई पिछली दो DGP नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए हैं। केंद्र का कहना है कि अनुराग गुप्ता को उस समय DGP बनाया गया, जब उनकी सेवानिवृत्ति में करीब तीन महीने ही बचे थे। इसके बाद 30 दिसंबर 2025 को तदाशा मिश्रा को DGP नियुक्त किया गया, जबकि उन्हें अगले ही दिन रिटायर होना था।
छह महीने की सेवा अवधि बना विवाद का मुख्य मुद्दा
मामले में सबसे बड़ा विवाद तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के समय बची हुई सेवा अवधि को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह मामले में DGP बनने के लिए कम से कम छह महीने की सेवा बची होने की शर्त रखी थी, लेकिन झारखंड सरकार ने अपने नए नियमों में इसमें बदलाव कर दिया। मामले में कोर्ट की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने 3 सितंबर को अपनी रिपोर्ट दाखिल कर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि 2025 में झारखंड सरकार की ओर से बनाए गए DGP चयन और नियुक्ति नियमों में कई प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से अलग हैं।




















