पश्चिम एशिया तनाव :इजरायल- अमेरिका का ईरान पर संयुक्त हमला, मौतों का आंकड़ा बढ़ा, 80 से ज्यादा छात्राओं की मौत

पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। शनिवार सुबह इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों पर एयर स्ट्राइक किए। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी ईरान में एक शैक्षणिक संस्थान पर हुए हमले में अब कुल 80 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
इजराइल की सेना ने बताया कि यह कार्रवाई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर की गई। हमलों में ईरान के खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय और Atomic Energy Organization of Iran को लक्ष्य बनाया गया। हमले के बाद खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।
ईरान की 80 से ज्यादा छात्राओं की मौत
इजराइल की ओर से किए गए हवाई हमले में ईरान के मिनाब शहर में बड़ा नुकसान हुआ है। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक, इस हमले में 40 छात्राओं की मौत हो गई, जबकि 45 अन्य घायल हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हमला एक शैक्षणिक परिसर के आसपास हुआ, जहां बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद थीं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
ईरान के घातक हमले, अमेरिकी सैन्य ठिकाने तबाह
इजराइल की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागते हुए इजराइल के विभिन्न इलाकों को निशाना बनाया। इसके साथ ही ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमला किया। कुवैत, कतर, बहरीन और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाए जाने की खबर है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख शहर दुबई पर भी मिसाइल हमला किए जाने की सूचना सामने आई है।
रूसी विदेश मंत्री ने हमले की निंदा की
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। रूसी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, लावरोव ने इन हमलों को बिना किसी उकसावे के की गई सशस्त्र कार्रवाई करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
हालात बेहद गंभीर
इस सैन्य टकराव के बाद पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और गहराता है तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय शांति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हैं।











