MP Assembly Session:निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 विधानसभा से पारित, पंचायत राज संशोधन पर चर्चा शुरू

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में केन-बेतवा परियोजना को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने परियोजना से प्रभावित गांवों, विस्थापित परिवारों और मुआवजे से जुड़े मामलों पर सरकार से जानकारी मांगी। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने जवाब देते हुए बताया कि पन्ना और छतरपुर जिलों में प्रभावित परिवारों को पुनर्वास पैकेज और भूमि अधिग्रहण का मुआवजा दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सर्वे के बाद छूटे हुए पात्र परिवारों को भी लाभ दिया गया है। वहीं विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे पर सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
पांच करोड़ की एफडी की अनिवार्यता खत्म
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026 चर्चा के लिए पटल पर रख दिया है। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने चर्चा में कहा कि कांग्रेस पार्टी इस संसोधन का विरोध करती है। सरकार निजी विश्वविद्यालय स्थापना के लिए निर्धारित 25 एकड़ जमीन में छूट दे रही है। 5 करोड रुपए की फिक्स डिपाजिट की अनिवार्यता को खत्म करना यह सरकार किसके दबाव में संशोधन कर रही है। इस बदलाव से सैकड़ों विश्वविद्यालय खुलेंगे और बड़ी संख्या में बंद हो जायेंगे। संस्थान फीस लेकर भाग जायेंगे। यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हमरी मांग है कि इस विधयक को रोका जाए। इससे प्रदेश कि शिक्षा व्यवस्था चौपट हो जाएगी। क्रांति सूर्य टांटया भील यूनिवर्सिटी में प्रतिनियुक्ति पर प्राध्यापक भेजकर शिक्षा का काम पूरा किया जाएगा
निजी विश्वविद्यालयों से बढ़ेंगे उच्च शिक्षा के अवसर
चिंतामणि मालवीय ने कहा कि निजी विश्वविद्यालय अब उच्च शिक्षा के मजबूत स्तंभ बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि कई राज्यों ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए सरल नियम बनाए हैं, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि तकनीक समाज को लगातार बदल रही है और शिक्षा व्यवस्था को भी इन बदलावों के अनुसार आगे बढ़ना होगा। विधायक ने कहा कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में 89 विश्वविद्यालय हैं लेकिन उच्च शिक्षा में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की अभी जरूरत है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में निवेश केवल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने तक सीमित नहीं है बल्कि यह बच्चों के भविष्य में किया गया निवेश है।
भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह ने कहा कि आज के समय में 25 एकड़ जमीन खरीदना बहुत महंगा हो गया है। इतनी बड़ी जमीन के लिए करीब 50 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब मल्टी स्टोरी और वर्टिकल बिल्डिंग के जरिए कम जगह में भी बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। वहीं कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है, जिससे सरकारी विश्वविद्यालय प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले में शिक्षाविदों की एक कमेटी बनाकर राय ली जानी चाहिए। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने भी निजी विश्वविद्यालयों के बंद होने पर छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता जताई और कहा कि कर्ज लेकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा, इसकी स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
समझौते का प्रावधान, निजी विवि विधेयक पर विरोध
मध्यप्रदेश विधानसभा में नई संहिता के तहत सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज जैसे मामलों में समझौते के जरिए विवाद खत्म करने के प्रावधान पर चर्चा हुई। वहीं पत्नी से क्रूरता के मामलों में बिना शर्त समझौते की अनुमति नहीं होगी। पीड़िता की सहमति और उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही समझौता किया जा सकेगा। विधानसभा में इंदर सिंह परमार ने मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 भी पेश किया, जिस पर कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे निजी विश्वविद्यालयों के नियम कमजोर होंगे और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज जैसे मामलों में अब समझौते से विवाद खत्म किया जा सकेगा। वहीं पत्नी से क्रूरता के मामलों में पीड़िता की सहमति जरूरी होगी। विधानसभा में इंदर सिंह परमार ने मप्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 पेश किया, जिस पर कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सवाल उठाए। उन्होंने 25 एकड़ जमीन और पांच करोड़ रुपये की अनिवार्यता खत्म करने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने पूछा कि यूनिवर्सिटी बंद होने की स्थिति में छात्रों के हितों की रक्षा कैसे होगी।
UCC विधेयक विधानसभा में पेश
मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गौतम टेटवाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक प्रस्तुत किया।
चरनोई जमीन और सोलर पार्क पर गरमाई चर्चा
मध्यप्रदेश विधानसभा में राजपुर विधानसभा क्षेत्र में चरनोई भूमि पर सोलर पार्क लगाने का मुद्दा उठा। कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से सरकार से इस मामले में जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की चरनोई जमीन ग्रामीणों और पशुओं के लिए उपयोगी है, इसलिए इसके उपयोग से पहले स्थानीय लोगों की सहमति जरूरी है। बाला बच्चन ने मांग की कि जब तक सभी नियमों का पालन नहीं होता, तब तक सोलर पार्क लगाने की प्रक्रिया को रोक दिया जाना चाहिए।
मंत्री बोले- जमीन अधिग्रहण की कार्रवाई नहीं
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि राज्य शासन की ओर से ग्राम सभा और ग्राम पंचायत को इस संबंध में जानकारी दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि सरकार सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार पूरी कर रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता के साथ काम किया जा रहा है।
विधानसभा में उठा विस्थापन और मुआवजे का मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रश्नकाल में सरकार से पूछा कि केन-बेतवा परियोजना के तहत छतरपुर और पन्ना जिलों में कितने गांव और परिवार विस्थापन, भूमि अधिग्रहण और डूब क्षेत्र से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि कितने परिवारों को मुआवजा, पुनर्वास पैकेज और अन्य सरकारी लाभ दिए गए हैं।
सरकार ने बताए प्रभावित परिवारों के आंकड़े
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि पन्ना जिले में परियोजना के तहत सात गांवों के 1321 परिवारों का विस्थापन किया गया है। इसके अलावा आठ गांवों के 644 खातेदारों की जमीन अधिग्रहित की गई है, जिसमें 1699 किसानों की भूमि शामिल है। उन्होंने बताया कि सभी प्रभावित परिवारों को पुनर्वास लाभ और भूमि अधिग्रहण का मुआवजा स्वीकृत किया जा चुका है। छतरपुर जिले के बिजावर क्षेत्र में कुल 14 गांवों के 3718 परिवार परियोजना से प्रभावित हुए हैं। मंत्री ने कहा कि इन सभी परिवारों के लिए निर्धारित लाभ स्वीकृत कर दिए गए हैं और वर्तमान में कोई भी परिवार लाभ पाने से वंचित नहीं है।
शिकायतों के बाद कराया गया दोबारा सर्वे
परियोजना प्रभावित परिवारों की ओर से पुनर्वास सूची में नाम छूटने, मुआवजे में गलती और लाभ वितरण में अनियमितता की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद सरकार ने दोबारा सर्वे कराने के लिए टीमों का गठन किया। मंत्री ने बताया कि जांच के बाद पात्र लोगों को शामिल किया गया और नियमों के अनुसार मुआवजा तय किया गया। छतरपुर जिले में भी प्रभावित परिवारों की शिकायतों के बाद ग्राम स्तर पर सर्वे कराया गया। पहले 3080 परिवारों को लाभ स्वीकृत किया गया था। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 638 अतिरिक्त पात्र परिवारों को भी निर्धारित राशि देने की मंजूरी दी गई।
विपक्ष ने छात्रों के मुद्दे पर किया विरोध
विधानसभा में विपक्ष के विधायक दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में काली पट्टी बांधकर पहुंचे। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने कहा कि इसी कारण विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। वहीं विधायक चैन सिंह बरकड़े ने भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) की बस संचालन कंपनी पर पेनल्टी लगाने का मामला उठाया। परिवहन मंत्री की अनुपस्थिति में मंत्री विश्वास सारंग ने जवाब दिया कि संबंधित कंपनी को नोटिस दिया गया था, क्योंकि उसने बसों का संचालन नहीं किया था।
सरकार और विपक्ष के बीच जारी रही बहस
केन-बेतवा परियोजना को लेकर विधानसभा में जहां सरकार ने प्रभावित परिवारों को राहत देने का दावा किया, वहीं विपक्ष ने पुनर्वास प्रक्रिया और अन्य मुद्दों पर सवाल उठाए। सदन में परियोजना, छात्रों के प्रदर्शन और परिवहन व्यवस्था जैसे विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।











