Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

Gaganyaan Mission : गगनयान के क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग सफल, क्रू कैप्सूल ने पैराशूट से बंगाल की खाड़ी में की सुरक्षित लैंडिंग

Follow on Google News
Gaganyaan Mission : गगनयान के क्रू एस्केप सिस्टम की टेस्टिंग सफल, क्रू कैप्सूल ने पैराशूट से बंगाल की खाड़ी में की सुरक्षित लैंडिंग
श्रीहरिकोटा। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने गगनयान मिशन की पहली टेस्ट फ्लाइट लॉन्च कर इतिहास रच दिया है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शनिवार सुबह 10 बजे गगनयान के क्रू मॉड्यूल को सफलता पूर्वक लॉन्च किया गया। इसे टेस्ट व्हीकल डेवलपमेंट फ्लाइंट (TV-D1) और टेस्ट व्हीकल अबॉर्ट मिशन-1 (Test Vehicle Abort Mission -1) भी कहा जा रहा है। इसरो के गगनयान मिशन के पहले टेस्ट मिशन (टीवी-डी-1) का लॉन्च सफल रहा। क्रू एस्केप मॉड्यूल लॉन्च के बाद अंतरिक्ष में पहुंचा और फिर सही-सलामत बंगाल की खाड़ी में उतर गया।

अबॉर्ट टेस्ट क्या है

अबॉर्ट टेस्ट का मतलब होता है कि, अगर कोई दिक्कत हो तो एस्ट्रोनॉट के साथ ये मॉड्यूल उन्हें सुरक्षित नीचे ले आए। इसका मतलब है, मिशन के दौरान रॉकेट में गड़बड़ी होने पर अंदर मौजूद एस्ट्रोनॉट को पृथ्वी पर सुरक्षित लाने वाले सिस्टम की टेस्टिंग हो रही है।

जानें मिशन में क्या-क्या हुआ

ये मिशन 8.8 मिनट का था। टेस्ट फ्लाइट में तीन हिस्से थे- अबॉर्ट मिशन के लिए बनाया सिंगल स्टेज लिक्विड रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप सिस्टम। उड़ान के करीब एक मिनट बाद 12 से 17 किमी की ऊंचाई पर अभियान को रद्द करने की कमांड दी गई। इस कमांड के साथ ही क्रू एस्केप सिस्टम एक्टिव हुआ और 90 सेकंड में यह क्रू मॉड्यूल से अलग हो गया। इसके बाद क्रू मॉड्यूल वापस पृथ्वी पर लौटा। पैराशूट की मदद से क्रू मॉड्यूल तय कॉर्डिनेट्स के हिसाब से श्रीहरिकोटा से 10 किमी दूर बंगाल की खाड़ी में उतरा। जहां भारतीय नौसेना की गोताखोर टीम और जहाज पहले से तैनात थे, उन्होंने क्रू मॉड्यूल को पानी से बाहर निकाला। लॉन्च से लेकर ‘क्रू मॉड्यूल’ (जिसमें अंतरिक्ष यात्री सवार होंगे) के बंगाल की खाड़ी में उतरने तक करीब 9 मिनट का समय लगा।

दो बार टली लॉन्चिंग

  • श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसे 8 बजे लॉन्च किया जाना था, लेकिन मौसम ठीक नहीं होने कारण इसका टाइम बदलकर 8.45 किया गया।
  • गगनयान के परीक्षण मिशन को लॉन्चिंग से 5 सेकंड पहले होल्ड कर दिया गया। इसरो प्रमुख ने कहा कि, टेस्ट फ्लाइट उड़ान नहीं भर पाई, क्योंकि इसके इंजन शुरू नहीं हुए।
  • जांच के बाद इसरो ने बताया कि, गड़बड़ी को ठीक कर लिया गया है। गगनयान की टेस्ट फ्लाइट सुबह 10 बजे लॉन्च हुई।

गगनयान मिशन में तीन एस्ट्रोनॉट 400 KM ऊपर जाएंगे

गगनयान मिशन में तीन दिवसीय मिशन के तहत मनुष्यों को 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है। क्रू मॉड्यूल के अंदर ही भारतीय अंतरिक्षयात्री यानी गगननॉट्स बैठकर धरती के चारों तरफ 400 किलोमीटर की ऊंचाई वाली निचली कक्षा में चक्कर लगाएंगे। अगर भारत अपने मिशन में कामयाब रहा तो वो ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। इसे पहले अमेरिका, चीन और रूस ऐसा कर चुके हैं।
  • 12 अप्रैल 1961 : सोवियत रूस के यूरी गागरिन स्पेस में 108 मिनट तक रहे।
  • 5 मई 1961 : अमेरिका के एलन शेफर्ड स्पेस में 15 मिनट रहे।
  • 15 अक्टूबर 2003 : चीन के यांग लिवेड स्पेस में 21 घंटे रहे।

पीएम मोदी ने ISRO को दिया लक्ष्य

  • प्रधानमंत्री ने हालिया चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 मिशन सहित भारतीय अंतरिक्ष पहल की सफलता के मद्देनजर निर्देश दिया कि भारत को अब 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर पहले भारतीय को भेजने सहित नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
  • इस सोच को साकार करने के लिए अंतरिक्ष विभाग चंद्र अन्वेषण के लिए एक खाका तैयार करेगा।
  • बयान में कहा गया कि इसमें चंद्रयान मिशन की एक श्रृंखला, अगली पीढ़ी के एक प्रक्षेपण यान (NGLV) का विकास, एक नए लॉन्च पैड का निर्माण, मानव-केंद्रित प्रयोगशालाओं और संबंधित प्रौद्योगिकियों की स्थापना शामिल होगी।
  • अंतरिक्ष विभाग ने गगनयान मिशन का एक समग्र अवलोकन पेश किया, जिसमें ‘ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल’ और प्रणाली दक्षता जैसी अब तक विकसित विभिन्न प्रौद्योगिकियों के बारे में बताया गया।
  • इस बात पर गौर किया गया कि ‘ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल’ (HLVM3) के तीन मानव रहित मिशन सहित लगभग 20 प्रमुख परीक्षणों की योजना बनाई गई है।
  • पीएम मोदी ने भारत की क्षमताओं पर विश्वास व्यक्त किया और अंतरिक्ष अन्वेषण में नई ऊंचाइयां छूने को लेकर देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
ये भी पढ़ें- Gaganyaan Mission : 2025 तक गगन में पहुंचेगा इंसान, 2035 तक बन जाएगा इंडियन स्पेस स्टेशन; 2040 तक ISRO पूरा करेगा टारगेट
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

Latest Posts