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ईरान की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा हमला!लारीजानी के बाद अब इंटेलिजेंस मंत्री खातिब की भी मौत; इजरायल बोला- अभी और चौंकाएंगे

इजरायल ने दावा किया है कि, उसने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को हमले में मार गिराया है। इससे पहले सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की मौत की भी पुष्टि हुई थी। तेहरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए हैं। हालांकि ईरान ने अभी तक इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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लारीजानी के बाद अब इंटेलिजेंस मंत्री खातिब की भी मौत; इजरायल बोला- अभी और चौंकाएंगे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    तेहरान। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इजरायल ने दावा किया है कि, उसने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को मार गिराया है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि, यह कार्रवाई रातभर चले सैन्य हमले के दौरान की गई। हालांकि, अभी तक ईरान की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 19वें दिन यह दावा सामने आया है। इससे पहले भी इजरायल ने ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाने की बात कही थी। हाल ही में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी की मौत की पुष्टि भी सामने आई थी। इजरायल का कहना है कि, वह ईरान की सैन्य और सुरक्षा नेतृत्व को लगातार निशाना बना रहा है ताकि उसकी रणनीतिक क्षमता को कमजोर किया जा सके।

    रातभर चले हमले में मारे गए इस्माइल खातिब

    इजरायल के रक्षा मंत्री ने बुधवार (18 मार्च 2026) को दावा किया कि, इजरायली सेना ने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को एक बड़े ऑपरेशन के दौरान मार गिराया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला रातभर चला और इसमें कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस ऑपरेशन में ईरान की खुफिया व्यवस्था से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों के भी मारे जाने की बात कही जा रही है।

    हालांकि, इस दावे पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर स्थिति साफ होने का इंतजार किया जा रहा है।

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    अमेरिका ने भी खातिब पर रखा था इनाम

    रिपोर्ट के अनुसार, इस्माइल खातिब उन अधिकारियों में शामिल थे जिनके बारे में अमेरिका जानकारी जुटा रहा था। पिछले सप्ताह अमेरिका ने उनके बारे में सूचना देने वाले के लिए 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम घोषित किया था। इजरायली अधिकारियों का कहना है कि, खातिब ईरान की खुफिया गतिविधियों के प्रमुख चेहरे थे और कई रणनीतिक अभियानों में उनकी अहम भूमिका थी।

    ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान इस्माइल खातिब की मौत की पुष्टि करेगा। अब तक ईरान की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि ईरान इस खबर की पुष्टि करता है, तो यह उसके लिए एक और बड़ा झटका माना जाएगा।

    नेतन्याहू और रक्षा मंत्री ने सेना को दी खुली छूट

    इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा कि, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उन्होंने मिलकर सेना को यह अधिकार दिया है कि यदि उन्हें मौका मिले तो किसी भी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, सेना को अब अतिरिक्त अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। जैसे ही खुफिया जानकारी के आधार पर मौका मिलेगा, सेना कार्रवाई कर सकेगी। रक्षा मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि, आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाली घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

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    तेहरान में कई सैन्य ठिकानों पर हमले

    इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया कि उसने तेहरान में कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला किया है। इनमें रिवोल्यूशनरी गार्ड की यूनिट, सुरक्षा बलों के लिए आपूर्ति केंद्र और मिसाइल सिस्टम और कमांड सेंटर शामिल हैं। इजरायली वायु सेना के अनुसार, इन हमलों में कई लोग मारे गए और कई घायल हुए हैं। हालांकि, इन हमलों से हुए नुकसान का पूरा आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है।

    अली लारीजानी की मौत से भी लगा था बड़ा झटका

    इस्माइल खातिब के मारे जाने के दावे से एक दिन पहले ईरान को एक और बड़ा झटका लगा था। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने पुष्टि की थी कि उसके सचिव अली लारीजानी इजरायली हमले में मारे गए। रिपोर्ट के अनुसार यह हमला मंगलवार (17 मार्च) की सुबह हुआ था।

    इस हमले में लारीजानी के साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी, काउंसिल के सुरक्षा मामलों के उप प्रमुख अलीरेजा बायात और कई अन्य अधिकारी भी मारे गए। लारीजानी ईरान की सुरक्षा नीतियों के प्रमुख चेहरों में से एक थे और पश्चिमी देशों के साथ परमाणु वार्ताओं में भी उनकी अहम भूमिका रही थी।

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    बसीज फोर्स के प्रमुख की भी मौत

    ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पहले ही पुष्टि की थी कि बसीज स्वयंसेवक बल के प्रमुख घोलमरेजा सोलेमानी की भी एक हमले में मौत हो गई। बताया गया कि यह हमला अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के दौरान हुआ था। बसीज बल ईरान की अर्धसैनिक इकाई है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    कौन थे इस्माइल खातिब?

    इस्माइल खातिब ईरान के खुफिया मंत्रालय (MOIS) के प्रमुख थे। वे देश की खुफिया और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करते थे। उनकी जिम्मेदारियों थीं-

    • विदेशी खुफिया गतिविधियों पर नजर रखना
    • राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऑपरेशन
    • आतंकवाद और जासूसी से निपटना
    • ईरान की रणनीतिक नीतियों के लिए खुफिया जानकारी जुटाना

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खातिब के साथ मंत्रालय के चार अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी हमले में मारे गए।

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    जंग में अब तक कई बड़े ईरानी नेता मारे गए

    रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायल और अमेरिका के हमलों में अब तक ईरान के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं।

    इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं-

    • अयातुल्लाह अली खामेनेई - ईरान के सुप्रीम लीडर
    • अली शामखानी - सुरक्षा सलाहकार
    • मोहम्मद पाकपुर - IRGC कमांडर
    • अजीज नसीरजादेह - रक्षा मंत्री
    • अब्दोलरहीम मुसावी - सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ
    • घोलमरेजा सोलेमानी - बसीज फोर्स प्रमुख
    • अली लारीजानी - राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव
    • इस्माइल खातिब - खुफिया मंत्री

    इसके अलावा कई जनरल, खुफिया अधिकारी और मिसाइल व परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिक भी हमलों में मारे जाने की खबरें हैं।

    मारे गए 40 वरिष्ठ ईरानी अधिकारी?

    कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों में करीब 40 वरिष्ठ ईरानी अधिकारी मारे जा चुके हैं। ये हमले मुख्य रूप से निम्न लक्ष्यों पर किए जा रहे हैं-

    • सैन्य कमांड सेंटर
    • मिसाइल अड्डे
    • सुरक्षा नेतृत्व
    • खुफिया संस्थान

    इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और नेतृत्व संरचना को कमजोर करना है।

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    मध्य पूर्व में चरम पर तनाव

    इजरायल और ईरान के बीच जारी यह संघर्ष अब मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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