एनरिच्ड यूरेनियम छोड़ने को तैयार ईरान!ट्रंप बोले- समझौता बेहद करीब, क्या अब खत्म हो जाएगी जंग?

तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में महीनों से जारी तनाव अब एक अहम मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर ऐसी खबरें सामने आई हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। दावा किया जा रहा है कि ईरान अपने हाईली एनरिच्ड यानी अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम भंडार को छोड़ने के लिए तैयार हो गया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वही मुद्दा था जो लंबे समय से दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि, प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देने पर सहमत हो सकता है। हालांकि इसे अमेरिका, रूस या किसी अन्य व्यवस्था के तहत कैसे ट्रांसफर किया जाएगा, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
ट्रंप का बड़ा दावा- समझौता लगभग तय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौता काफी हद तक तय हो चुका है। ट्रंप के मुताबिक यह डील सिर्फ युद्ध रोकने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए भी बेहद जरूरी है।
ट्रंप ने कहा कि अंतिम शर्तों और तकनीकी पहलुओं पर बातचीत जारी है और जल्द ही बड़ा ऐलान किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने इजरायल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं से बातचीत की है।

क्या है हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का मामला?
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता लंबे समय से बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास बड़ी मात्रा में ऐसा यूरेनियम मौजूद है जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है।
60% Enriched Uranium - Near Weapon Grade
जानकारी के मुताबिक, 60% तक संवर्धित यूरेनियम को ‘नियर वेपन ग्रेड’ माना जाता है। यानी इसे आगे प्रोसेस करके परमाणु हथियार बनाने की दिशा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यूरेनियम संवर्धन कितना खतरनाक?
3% से 5% तक एनरिच्ड यूरेनियम
इसका इस्तेमाल न्यूक्लियर पावर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
20% तक एनरिच्ड यूरेनियम
इसे हाई लेवल माना जाता है, लेकिन इससे सीधे हथियार नहीं बनाए जा सकते।
60% तक एनरिच्ड यूरेनियम
यह बेहद संवेदनशील स्तर माना जाता है और इसे ‘नियर वेपन ग्रेड’ कहा जाता है।
90% या उससे ज्यादा
इसे वेपन ग्रेड कहा जाता है, जिससे परमाणु बम तैयार किया जा सकता है।
90% Enriched Uranium - Weapon Grade
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अमेरिका ने दी थी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुरुआत में ईरान इस मुद्दे को शुरुआती समझौते में शामिल नहीं करना चाहता था। तेहरान चाहता था कि, यूरेनियम पर फैसला बाद की बातचीत में लिया जाए। लेकिन अमेरिकी वार्ताकारों ने कहा कि, अगर शुरुआती समझौते में यूरेनियम स्टॉक को लेकर प्रतिबद्धता नहीं दिखाई गई, तो अमेरिका बातचीत छोड़कर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के कई विकल्प तैयार कर लिए थे। इनमें इस्फहान परमाणु केंद्र पर बंकर बस्टर हमले और अमेरिका-इजरायल के संयुक्त कमांडो ऑपरेशन तक की चर्चा शामिल थी।
क्यों इतना अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से दुनिया तक पहुंचता है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार और सप्लाई चेन पर असर पड़ा।
अब अगर समझौता होता है और होर्मुज दोबारा सामान्य रूप से खुलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों को बड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि ईरान ने ट्रंप के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि होर्मुज पूरी तरह फ्री पैसेज के तहत खोला जाएगा। तेहरान का कहना है कि, जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बना रहेगा।
ईरान के अंदर भी अलग-अलग बयान
दिलचस्प बात यह है कि ईरान के अंदर इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने संकेत दिया था कि संवर्धित यूरेनियम देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा।
वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई नेताओं ने कहा था कि अमेरिका जरूरत से ज्यादा मांग कर रहा है और फिलहाल कोई अंतिम डील नहीं हुई है। हालांकि बातचीत जारी रहने की बात जरूर स्वीकार की गई है।
ट्रंप बोले- समझौते के 50-50 चांस
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि, ईरान के साथ समझौते की संभावना 50-50 है। उन्होंने कहा कि या तो अच्छा समझौता होगा या फिर अमेरिका ईरान पर बेहद कड़ा हमला कर सकता है। ट्रंप ने यह भी बताया कि, वह अपने शीर्ष सलाहकारों, दूत स्टीव विटकॉफ, जैरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे।
अमेरिका में भी बढ़ा विरोध
ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर भी राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने चेतावनी दी है कि, अगर इस समझौते के बाद ईरान को अरबों डॉलर की राहत मिलती है और वह परमाणु क्षमता बनाए रखता है, तो यह अमेरिका की बड़ी रणनीतिक गलती होगी। वहीं रिपब्लिकन नेता लिंडसे ग्राहम ने सवाल उठाया कि अगर अंत में समझौता ही करना था तो फिर सैन्य कार्रवाई क्यों शुरू की गई।











