Iran-US Conflict :ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी में अमेरिका, मिडिल ईस्ट में भेजे 50 से ज्यादा फाइटर जेट

ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी हवाई ताकत बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी सेना ने यूएस सेंट्रल कमांड (CENTOM) के अधिकार क्षेत्र में 50 से ज्यादा अतिरिक्त लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। इस कदम को केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियान की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते खतरे से निपटना और ईरान की मिसाइल एवं ड्रोन क्षमता पर दबाव बनाना है।
यूरोप के एयर बेस से भेजे गए एडवांस फाइटर जेट
अमेरिका ने इस अभियान के तहत यूरोप के कई एयर बेस से आधुनिक लड़ाकू विमान मिडिल ईस्ट भेजे हैं। इनमें ब्रिटेन स्थित आरएएफ लेकेनहीथ (RAF Lakenheath) एयर बेस से 15 F-35A स्टेल्थ फाइटर जेट और 12 F-15 स्ट्राइक ईगल भेजे गए हैं। इसके अलावा इटली के एवियानो एयर बेस से 12 F-16 और जर्मनी के स्पैंगडाहलेम एयर बेस से भी 12 F-16 विमान रवाना किए गए हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मनी से अतिरिक्त F-16 और ब्रिटेन से F-35 विमान भी क्षेत्र में भेजे जा रहे हैं। इनके साथ एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट भी तैनात किए गए हैं, ताकि लड़ाकू विमान लंबी दूरी तक लगातार अभियान चला सकें।
जॉर्डन हमले के बाद तेज हुई सैन्य तैयारियां
रिपोर्ट के मुताबिक, इन लड़ाकू विमानों की तैनाती जॉर्डन में ईरानी हमले से पहले ही शुरू हो चुकी थी। हालांकि, CENTCOM ने इस सैन्य गतिविधि पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। इसके बावजूद रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका क्षेत्र में अपनी हवाई बढ़त बनाए रखना चाहता है ताकि किसी भी संभावित हमले का तुरंत जवाब दिया जा सके।
क्यों बढ़ा रहा है अमेरिका अपनी सैन्य ताकत?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब लगातार कई दिनों से चल रहा है। इस दौरान ईरान ने जॉर्डन, कतर और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं। अमेरिका का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों और मिसाइल हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है। यही वजह है कि उसने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर ईरान को संदेश देने की रणनीति अपनाई है। रक्षा विशेषज्ञ इसे 'डिटरेंस स्ट्रैटेजी' यानी विरोधी को हमले से रोकने की सैन्य नीति का हिस्सा मान रहे हैं।
F-35, F-15 और F-16 क्यों हैं अहम?
अमेरिका ने जिन विमानों की तैनाती की है, वे उसकी सबसे आधुनिक वायु शक्ति का हिस्सा हैं। F-35 स्टेल्थ तकनीक से लैस है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक हमला कर सकता है। वहीं F-15 स्ट्राइक ईगल लंबी दूरी तक भारी हथियार ले जाने और सटीक हमलों के लिए जाना जाता है। F-16 बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है, जिसका इस्तेमाल हवाई सुरक्षा और आक्रामक अभियानों दोनों में किया जाता है। एरियल रिफ्यूलिंग विमान इन लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन उपलब्ध कराते हैं, जिससे वे लंबे समय तक मिशन पर बने रह सकते हैं।












