हिंदू धर्म में व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि व्रत रखने और पूजा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सभी एकादशियों में आमलकी एकादशी को बहुत पवित्र माना जाता है। फाल्गुन महीने में आने वाली आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी (शुक्रवार) को रखा जाएगा।
इस दिन लोग आंवले के पेड़ की पूजा करते हैं और भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करते हैं। माना जाता है कि आमलकी एकादशी के दिन ही आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई थी और इसमें भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए इस व्रत में आंवले का विशेष महत्व है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के पेड़ की उत्पत्ति ब्रह्मा जी के आंसुओं से हुई थी। जब सृष्टि की रचना के लिए उन्होंने तपस्या की और भगवान विष्णु प्रकट हुए, तब खुशी के आंसुओं से आंवले का पेड़ जन्मा। इसी कारण इसे पहला वृक्ष या आदिवृक्ष भी कहा जाता है।
एक दूसरी मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय गिरी अमृत की बूंदों से आंवले के पेड़ उत्पन्न हुए, इसलिए इसे अमृत फल भी कहा जाता है।
आमलकी एकादशी का व्रत रखने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत का पुण्य हजार गायों के दान के बराबर माना गया है।
प्रसाद में आंवले का सेवन सेहत के लिए भी लाभकारी होता है। आंवले में विटामिन C, A, B1, E, कैल्शियम और आयरन भरपूर होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और त्वचा व बालों को स्वस्थ रखते हैं।