'आंखो के सामने' खतरा :बिना डिग्री-डिप्लोमा वाले दुकानों पर दे रहे चश्मों के नंबर

प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। आठ साल की राबिया आंखों में दर्द और आंसू की समस्या से परेशान थी। उसके पिता ने कॉलोनी में ही एक चश्मे की दुकान पर आंखों की जांच करा कर चश्मा बनवा लिया। इससे राबिया की दिक्कत कम होने की जगह और बढ़ गई। उसे आंखों के साथ सिरदर्द की शिकायत होने लगी। गांधी मेडिकल कॉलेज में दिखाने पर पता चला कि राबिया को गलत नंबर का चश्मा दिया गया है, जिससे उसे एम्ब्लियोपिया (लैजी आई) हो गया है।
दुकान के कर्मचारी ही कर देते हैं जांच
दरअसल, शहर में चल रही सैकड़ों चश्मों की दुकानों में अनट्रेंड स्टाफ बिना किसी डिग्री, डिप्लोमा के आंखों की जांचकर कर रहा है। हालात यह है कि यह कर्मचारी जांच कर चश्मा भी बना देते हैं। आंखों के नंबर की जांच तकनीकी विषय है और इसके लिए बकायदा कोर्स होता है। भोपाल शहर में 450 से ज्यादा चश्मा बनाने वालों की दुकानें हैं।
सिर्फ नंबर ही नहीं, दवा भी देते हैं
यह फर्जीवाड़ा सिर्फ चश्मे के नंबर तक ही सीमित नहीं है, कई दुकानदार आंखों में गड़बड़ी होने पर दवा तक दे देते हैं। मोतियाबिंद, शुगर के कारण आंख के पर्दे में खराबी आने या काला पानी होने जैसी बीमारी की दवा अक्सर चश्मा बनाने वाला ही दे देता है। इस गड़बड़ी को परखने के लिए पीपुल्स समाचार ने इन दुकानों की पड़ताल की...
दो उदाहरण : बिना डिग्री बस अनुभव से बना रहे चश्मे
- पीरगेट स्थित चश्मे की दुकान पर कर्मचारी की चश्मा बना रहा था। उन्होंने बताया कि उनके पास कम्प्यूटराइज्ड मशीन है, उससे जांच कर देंगे। जब दुकानदार से डिग्री पूछी तो उसने बताया कि 20 साल से यही काम कर रहा है। डिग्री की जरूरत नहीं होती, आज तक नंबर गड़बड़ नहीं हुआ।
- डीआईजी बंगला स्थित एक दुकान पर अटेंडर नंबर जांच रहा था। उससे डिग्री मांगी तो बताया कि दुकान के मालिक ने मशीन पर जांच करना सिखाया है। वो मशीन पर जांच कर मालिक को देता है, इसके बाद वो भी चेक करते हैं। अटेंडर ने बताया कि 12वीं के बाद से ही वो यही काम कर रहा है।
गलत नंबर से यह दिक्कतें
- सिर दर्द होता रहता है।
- आंखों में भेंगापन आ सकता है।
- जब चश्मे का नंबर गलत हो तो आंख की मांसपेशियां चीजों को साफ देखने के लिए लगातार जोर लगाती रहती हैं।
- जब लैंस का पावर या ऑप्टिकल सेंटर आंखों के अनुरूप नहीं होता, तो चीजें थोड़ी झुकी हुई या हिलती हुई महसूस हो सकती हैं।
- अगर नंबर बहुत ज्यादा अलग है, तो चीजें साफ दिखने की बजाय ज्यादा धुंधली या विकृत दिखती हैं। प्रिज्म पावर गलत हो तो एक चीज दो बार दिखाई दे सकती है।
- किसी एक आंख का नंबर गलत है और वह आंख ठीक से इस्तेमाल नहीं हो रही है, तो एम्ब्लियोपिया (जिसे आलसी आंख कहते हैं) जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।
चश्मे के नंबर सिर्फ डॉक्टर दे सकते हैं
चश्मे के नंबर देने का अधिकार सिर्फ डॉक्टर को है। नंबरों की जांच के लिए दो साल का ऑप्टोमैट्रिक्स डिप्लोमा कोर्स किए होता है।
डॉ. ललित श्रीवास्तव, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ
लोग शिकायत नहीं करते
ऐसा कोई नियम नहीं है, जिसके आधार पर इन दुकानों की जांच की जा सके। लोग भी शिकायत नहीं करते हैं। इसलिए गड़बड़ी हो रही है।
डॉ. मनीष शर्मा , सीएमएचओ, भोपाल












