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पाक सेना प्रमुख का विवादित बयान...बोले- ईरान से मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ, शिया समुदाय में आक्रोश

पाकिस्तान में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहां आसिम मुनीर के बयान ने सियासी और धार्मिक माहौल को गरमा दिया है। रावलपिंडी में आयोजित शिया समुदाय की एक इफ्तार बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि जो लोग ईरान से इतना लगाव रखते हैं
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बोले- ईरान से मोहब्बत है तो वहीं चले जाओ, शिया समुदाय में आक्रोश
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पाकिस्तान में एक बड़ा विवाद सामने आया है जहां आसिम मुनीर के बयान ने सियासी और धार्मिक माहौल को गरमा दिया है। रावलपिंडी में आयोजित शिया समुदाय की एक इफ्तार बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि जो लोग ईरान से इतना लगाव रखते हैं, वे वहां जाकर रह सकते हैं। उनके इस बयान को शिया धर्मगुरुओं ने अपमानजनक और भड़काऊ बताया है।

    इफ्तार बैठक में दिया गया बयान

    मुनीर ने साफ कहा कि पाकिस्तान में किसी को भी किसी दूसरे देश के प्रति वफादारी के नाम पर अस्थिरता फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बाहरी घटनाओं के आधार पर देश के भीतर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि इस बयान के बाद वहां मौजूद शिया नेताओं ने इसे सीधे तौर पर अपनी देशभक्ति पर सवाल उठाने जैसा बताया। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था को देशभक्ति से जोड़ना गलत है।

    कार्यक्रम छोड़कर चले गए मुनीर

    बैठक के बाद उलेमाओं को बताया गया था कि डिनर के बाद चर्चा फिर से होगी लेकिन जनरल मुनीर अचानक कार्यक्रम छोड़कर चले गए। इससे शिया नेताओं में नाराजगी और बढ़ गई। उनका कहना है कि यह व्यवहार न केवल औपचारिक बल्कि व्यक्तिगत तौर पर भी अपमानजनक था।

    शिया नेताओं का जवाब

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    शिया समुदाय के नेताओं ने इस बयान का विरोध करते हुए कहा कि उनकी वफादारी पूरी तरह पाकिस्तान के प्रति है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देश के निर्माण और विकास में शिया समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। धर्मगुरु मोहम्मद शिफा नजफी ने मौके पर ही इस बयान का विरोध किया और कहा कि पूरे समुदाय को कुछ घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की सेना और नेतृत्व में भी शिया समुदाय की अहम भूमिका रही है।

    विरोध प्रदर्शनों से जुड़ा मामला

    शिया नेताओं का मानना है कि यह बयान हाल ही में अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में हुए प्रदर्शनों से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप है कि मुनीर ने गिलगित-बाल्टिस्तान की घटनाओं के लिए शिया नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की।

    बदलती विदेश नीति की झलक

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान पाकिस्तान की बदलती विदेश नीति का संकेत भी हो सकता है। पहले पाकिस्तान ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता था, लेकिन अब उसका झुकाव सऊदी अरब और उसके सहयोगियों की ओर बढ़ता दिख रहा है।

    आधिकारिक बयान में अलग तस्वीर

    विवाद बढ़ने के बाद पाकिस्तान सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि जनरल मुनीर ने धार्मिक नेताओं से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने और सांप्रदायिक तनाव से बचने की अपील की थी।

    ये भी पढ़ें: मिडिल ईस्ट युद्ध : अमेरिका की ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर भीषण बमबारी, स्थानीय रहवासी पूरी तरह सुरक्षित

    पाकिस्तान में बड़ी शिया आबादी

    पाकिस्तान में शिया समुदाय की आबादी करीब 15 फीसदी मानी जाती है, जो संख्या के लिहाज से काफी बड़ी है। ऐसे में सेना प्रमुख का यह बयान देश के अंदर सामाजिक और राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान में धार्मिक और राजनीतिक संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।

    Sumit  Shrivastava
    By Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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