मिडिल ईस्ट युद्ध :अमेरिका की ईरान के नतांज परमाणु केंद्र पर भीषण बमबारी, स्थानीय रहवासी पूरी तरह सुरक्षित

मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों में शामिल नतांज परमाणु केंद्र (Natanz Nuclear Facility) पर हुए भीषण हमले ने क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस ऑपरेशन में अमेरिका और इजरायल की वायु सेनाओं की संयुक्त सैन्य भूमिका बताई जा रही है, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर झटका देना था।
अमेरिकी हमले में परमाणु ढांचे को भारी नुकसान
सूत्रों के अनुसार, इस हमले में नतांज स्थित भूमिगत यूरेनियम संवर्धन संयंत्रों को निशाना बनाया गया। यह वही स्थान है जहां अत्याधुनिक सेंट्रीफ्यूज मशीनों के जरिए यूरेनियम को समृद्ध किया जाता है। इजराइली खुफिया एजेंसियों का दावा है कि हमले में इन सेंट्रीफ्यूज और संबंधित बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। नतांज को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की रीढ़ माना जाता है, ऐसे में यह हमला रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
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आसपास के रहवासी पुरी तरह सुरक्षित
हमले के बाद सबसे बड़ी चिंता रेडियोधर्मी रिसाव को लेकर थी, लेकिन अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय निगरानी एजेंसियों के शुरुआती संकेत बताते हैं कि किसी भी तरह का रेडिएशन लीक नहीं हुआ है। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को फिलहाल सुरक्षित बताया गया है, जिससे एक बड़े परमाणु हादसे की आशंका टल गई है।
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ईरानी राष्ट्रपति बोले- देश कार्रवाई का जवाब देगा
इस हमले के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी नेतृत्व ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़े प्रतिशोध की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ने साफ कहा है कि देश इस कार्रवाई का जवाब देगा और अपने परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।
कई बार टारगेट बन चुका नतांज
रिकॉर्ड बताते हैं कि 2025 से अब तक नतांज केंद्र कई बार हमलों का शिकार हो चुका है। हालांकि हर बार भौतिक नुकसान जरूर हुआ, लेकिन पर्यावरणीय खतरे या रेडिएशन रिसाव जैसी स्थिति नहीं बनी। इसके बावजूद लगातार हो रहे हमले इस क्षेत्र को संवेदनशील बनाए हुए हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दुनियाभर को खतरा
इस हमले का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखने लगा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर दुनिया भर की इकोनॉमी पर पड़ेगा।











