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ईरान-इसराइल युद्ध: किसी दौर में थी गहरी दोस्ती, फिर क्यों हुई ऐसी दुश्मनी, क्या है इसके पीछे का इतिहास?

ईरान और इसराइल के बीच जो जंग छिड़ी है उसका इतिहास काफी पुराना है। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि आज के दौर के कट्टर दुश्मन किसी दौर में करीबी दोस्त हुआ करते थे। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि दोनों देशों के बीच की दोस्ती इतनी गहरी दुश्मनी में बदल गई?
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 किसी दौर में थी गहरी दोस्ती, फिर क्यों हुई ऐसी दुश्मनी, क्या है इसके पीछे का इतिहास?
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    साल 1948 से 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान और इसराइल के बीच के संबंध काफी अच्छे व रणनीतिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण थे। देश ईरान साल 1950 में इसराइल को मान्यता देने वाला तुर्की के बाद दूसरा मुस्लिम बहुल देश था। दोनों देशों के बीच सैन्य और आर्थिक संबंध भी बहुत अच्छे थे। उस दौर में ईरान- इसराइल को मुख्य रूप से तेल आपूर्ति किया करता था। साथ ही दोनों देशों ने मिलकर एक साथ 'ट्रांस-इसराइल ' तेल पाइपलाइन का निर्माण किया था। 
    यही नहीं दोनों देशों के बीच के रणनीतिक संबंध भी उस दौर में बहुत अच्छे थे।  इसराइल ने अरब देशों के खिलाफ गैर-अरब देशों (जैसे ईरान और तुर्की) के साथ गठबंधन की रणनीति 'पेरिफेरी डॉक्ट्रिन' के अंर्तगत अपनाई थी। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि दोनों देशों की दोस्ती गहरी दुश्मनी में बदल गई?

    साल 1979 से 2000 के बीच बदल गए सारे रिश्ते

    दरअसल, साल 1979 में ईरान में ताज का तख्तापलट हुआ और अयातुल्ला खुमैनी सत्ता में आए, जिससे दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह से बदल गए। आपसी वैचारिक टकराव पनपने लगे। नई सरकार ने इसराइल को "लिटिल शैतान" (Little Satan) घोषित कर दिया साथ ही उसके अस्तित्व को मिटाने की घोषणा भी कर डाली। नतीजतन ईरान और इसराइल के बीच प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) छिड़ गया। ईरान ने इसराइल के खिलाफ लड़ने के लिए लेबनान में हिजबुल्लाह और बाद में गाजा में हमास जैसे समूहों को समर्थन देना शुरू कर दिया जिससे आपसी रंजिशें बढ़ती चली गईं।

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     साल 2000 से लेकर अब तक हो रहे परमाणु तनाव और गुप्त युद्ध 

    ईरान के परमाणु कार्यक्रम ने इसराइल के लिए अस्तित्व का गंभीर खतरा पैदा कर दिया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता चला गया। 'कोवर्ट ऑपरेशन के तहत इसराइल ने ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या और साइबर हमलों (जैसे Stuxnet) के जरिए उसके कार्यक्रम को रोकने की कोशिश भी की।
    वहीं, साल 2020 में 'अब्राहम एकॉर्ड' के रूप में इसराइल द्वारा कई अरब देशों के साथ संबंधों को सामान्य करने के कदम को ईरान ने अपने खिलाफ एक घेराबंदी के रूप में देखा।

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    2024 से 2026 में दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य संघर्ष शुरू

    साल 2024 से दोनों देशों के बीच पनप रहा यह संघर्ष गुप्त कार्रवाइयों से निकलकर सीधे युद्ध के रूप में बदल गया। साल 2024 के अप्रैल में दमिश्क स्थित ईरानी दूतावास पर इसराइली हमले के बाद ईरान ने पहली बार सीधे इसराइल पर 300 से अधिक ड्रोन और मिसाइलें दागीं। अक्टूबर 2024 में ईरान ने फिर से इसराइल पर 180 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। 

    वहीं, साल 2025 के जून महीने में ईरान और इसराइल के बीच 12 दिवसीय युद्ध चलता रहा। जिसमें इसराइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर अचानक हमला बोल दिया। (ऑपरेशन राइजिंग लायन), जिसके जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भारी मिसाइली हमले किए। इस युद्ध में ईरान में लगभग 610 और इसराइल में 29 लोगों की मौत हुई।

    आज 28 फरवरी 2026 को इसराइल ने एक बार फिर ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को रोकने के लिए तेहरान पर एक और बड़ा "प्री-एम्प्टिव" (निवारक) हमला किया है। जिसके जवाब में ईरान ने अपने सारे हाईवेज बंद कर दिए हैं और अपनी सेना को पलटवार के लिए पूरी तरह से तैयार कर चुकी है।

    Geetanjali Sharma
    By Geetanjali Sharma
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