तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक और रणनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपने पड़ोसी देश इराक के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। ईरान ने घोषणा की है कि, इराक के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की पूरी छूट दी जाएगी और उस पर लगाए गए किसी भी संभावित प्रतिबंध से इराक को बाहर रखा जाएगा।
दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान पर दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि, अगर 48 घंटे के अंदर होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला गया या कोई समझौता नहीं हुआ तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस बयान के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ गया है।
ईरान की इस घोषणा को कूटनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ‘खतम अल-अनबिया’ ने स्पष्ट किया है कि, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने पर लगने वाले संभावित प्रतिबंधों से इराक को पूरी तरह छूट दी जाएगी।
इस कमान का काम ईरान की सैन्य रणनीति और विभिन्न सशस्त्र बलों के बीच समन्वय स्थापित करना है। ऐसे में इस स्तर से आया बयान यह संकेत देता है कि ईरान अपने सहयोगी देशों के साथ रिश्तों को मजबूत बनाए रखना चाहता है।
ईरानी मीडिया के हवाले से आई रिपोर्ट में बताया गया है कि, यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
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ईरान की इस घोषणा के बाद यह साफ हो गया है कि, इराक के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में किसी तरह की बाधा नहीं होगी। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जुल्फघारी ने कहा कि इराक ने इस पूरे संघर्ष के दौरान ईरान का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा, इराक के लोग इस संघर्ष में मजबूती के साथ हमारे साथ खड़े रहे हैं। ऐसे में उनके जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने से रोकने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने आगे कहा कि, इराक के जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से बिना किसी रोक-टोक के गुजर सकेंगे।
इस बयान के दौरान ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर भी गंभीर आरोप लगाए। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इन देशों ने ईरान की संप्रभुता पर हमला किया है। ब्रिगेडियर जनरल जुल्फघारी ने आरोप लगाया कि हमलों में महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया। उनके अनुसार स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक सेवा से जुड़े संस्थानों पर भी हमले किए गए। ईरान ने इन हमलों को अपनी राष्ट्रीय और इस्लामी संप्रभुता पर “क्रूर हमला” बताया है।
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ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी इस मुद्दे पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में शामिल नहीं हैं, उनके जहाजों को ईरानी जलक्षेत्र से गुजरने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, इसके लिए एक शर्त भी रखी गई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे जहाजों को पहले से ईरान के साथ समन्वय स्थापित करना होगा और अपनी आवाजाही की जानकारी देनी होगी। इसके बाद उन्हें समुद्री मार्ग का उपयोग करने की अनुमति दी जाएगी। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि ईरान अपने सहयोगी या तटस्थ देशों के साथ समुद्री व्यापार और आवाजाही को पूरी तरह रोकना नहीं चाहता।
इन घटनाक्रमों के बीच अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर इस समय सीमा के भीतर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला या किसी समझौते पर सहमति नहीं जताई, तो अमेरिका कड़ा कदम उठाएगा।
ट्रंप ने कहा कि पहले भी ईरान को बातचीत और समझौते के लिए 10 दिन का समय दिया गया था, लेकिन अब वह समय लगभग खत्म हो चुका है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने यह चेतावनी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जारी की। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि समय तेजी से खत्म हो रहा है और अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। अगर इस अवधि में कोई समाधान नहीं निकलता तो अमेरिका कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। अपने बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि यह एक निर्णायक समय है और दुनिया को यह देखना होगा कि आगे क्या होता है। उनका यह बयान कूटनीतिक दबाव बढ़ाने के साथ-साथ मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव को भी बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
इस पूरे विवाद के बीच एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के बुशहर परमाणु ठिकाने को अमेरिका और इजरायल ने निशाना बनाया। बताया गया कि इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई। इसके जवाब में ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के दो फाइटर जेट्स को मार गिराया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग के जरिए होती है। ऐसे में अगर यह रास्ता बंद होता है या यहां तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को अब एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है। इस दौरान कई बार बड़े सैन्य टकराव और हमलों की खबरें सामने आ चुकी हैं। अब अमेरिका की चेतावनी और ईरान के जवाबी रुख के बाद यह आशंका और बढ़ गई है कि यह संघर्ष और बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। खाड़ी क्षेत्र के कई देश इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि यहां की किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।
मौजूदा हालात में पूरी दुनिया की नजर अगले 48 घंटों पर टिकी हुई है। अगर इस दौरान कोई कूटनीतिक समाधान निकलता है तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और गहरा सकता है।