मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। पहले से ही आर्थिक दबाव झेल रहे देश के लिए अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में उछाल नई चुनौती बनकर सामने आया है। इसी बीच पाकिस्तान सरकार ने एक बड़ा और सख्त फैसला लेते हुए लग्जरी वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-ऑक्टेन ईंधन पर शुल्क में भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस कदम को जहां सरकार आर्थिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश बता रही है, वहीं इसका असर देश के उच्च वर्ग और ऑटो सेक्टर पर साफ दिखने लगा है।
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प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया कि हाई-ऑक्टेन ईंधन पर लगाया जाने वाला शुल्क ₹100 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹300 प्रति लीटर कर दिया जाए। इसका मतलब है कि अब इस विशेष ईंधन का उपयोग करने वाले वाहन मालिकों को प्रति लीटर ₹200 अतिरिक्त चुकाने होंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम आम जनता पर सीधा बोझ डाले बिना राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। चूंकि हाई-ऑक्टेन ईंधन मुख्य रूप से महंगी और लग्जरी गाड़ियों में उपयोग होता है, इसलिए इसका असर सीमित वर्ग तक ही रहेगा।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और ईरान से जुड़े तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, वहां बढ़ते जोखिम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बन गई है। तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और महंगाई दर पर पड़ रहा है।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब हाल के दिनों में ईंधन महंगा हुआ है। इससे पहले 6 मार्च को सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इस बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 321.17 प्रति लीटर और डीजल 335.86 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ा दिया है, भले ही सरकार हाई-ऑक्टेन फैसले को सीमित प्रभाव वाला बता रही हो।
ईंधन संकट का असर सिर्फ सड़क परिवहन तक सीमित नहीं है। जेट फ्यूल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी के चलते हवाई यात्रा भी महंगी हो गई है। 10 मार्च से घरेलू उड़ानों के टिकट 2,800 से 5,000 तक महंगे हो गए हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए यात्रियों को 10,000 से 28,000 तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। इससे पर्यटन और व्यापारिक यात्रा पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार का कहना है कि यह फैसला आर्थिक संतुलन बनाए रखने और आम लोगों पर सीधे बोझ से बचाने के लिए लिया गया है, लेकिन लग्जरी ईंधन महंगा होने से महंगे वाहनों के संचालन की लागत बढ़ेगी।
वित्त मंत्री और पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा हालात में कठोर फैसले लेना जरूरी हो गया है।
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी कर्ज के बोझ से जूझ रहा है। ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल ने हालात को और जटिल बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो पाकिस्तान को आने वाले समय में और कड़े आर्थिक कदम उठाने पड़ सकते हैं।