PlayBreaking News

रुपया गिरा रिकॉर्ड स्तर पर:डॉलर के मुकाबले ऑल-टाइम लो, बाजार और तेल की कीमतों का दबाव जारी

डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने दबाव बढ़ाया।
Follow on Google News
डॉलर के मुकाबले ऑल-टाइम लो, बाजार और तेल की कीमतों का दबाव जारी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भारतीय रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हुआ और शुरुआती कारोबार में 41 पैसे गिरकर 93.94 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मजबूत डॉलर, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर शेयर बाजार ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह गिरावट जारी रही तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हस्तक्षेप कर सकता है।

    ये भी पढ़ें: मार्च में ही बदले मौसम के तेवर : IMD ने यूपी- बिहार सहित इन राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट, अगले 5 दिन जमकर भिगेंगे कई शहर

    रुपया कमजोर: रिकॉर्ड गिरावट

    इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में सोमवार को रुपया 93.84 पर खुला और तेजी से गिरकर 93.94 तक पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर 93.53 के मुकाबले 41 पैसे की गिरावट दिखाता है। शुक्रवार को भी रुपया पहली बार 93 के पार गया था और 64 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ था। इस लगातार गिरावट से निवेशकों और आम जनता की चिंता बढ़ गई है।

    तेल और डॉलर का दोहरा दबाव

    फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर ज्यादा दबाव डाला है। भारत खाड़ी देशों से तेल आयात करता है, और प्रति बैरल अब लगभग 50 डॉलर अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। इसके चलते डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हुआ। फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी हेड अनिल कुमार भंसाली का कहना है कि बाजार में डॉलर की भारी मांग के चलते रुपया तेजी से गिरा। उन्होंने बताया कि RBI अलग-अलग स्तरों पर हस्तक्षेप कर रहा है, लेकिन डॉलर की बढ़ती मांग के कारण रुपये को गिरने से नहीं रोका जा सका।

    एफपीआई आउटफ्लो और शेयर बाजार की कमजोरी

    घरेलू शेयर बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया। जोखिम से बचने के लिए निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर जा रहे हैं। शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध आधार पर 5,518.39 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और शेयर बाजार की कमजोरी रुपये की कमजोरी को और बढ़ा सकती है।

    RBI के हस्तक्षेप की संभावना

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रुपये में गिरावट लगातार बनी रहती है, तो RBI बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। हालांकि, तेल कंपनियों और विदेशी निवेशकों की बढ़ती डॉलर मांग के कारण निकट भविष्य में रुपये पर दबाव जारी रहने की संभावना है। वर्तमान में डॉलर इंडेक्स 0.02% बढ़कर 99.66 पर बना हुआ है, जो वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती को दर्शाता है।

    वैश्विक तेल बाजार का प्रभाव

    वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा में सोमवार को 0.60% गिरावट के साथ 112.90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। उच्च तेल कीमतों के कारण भारत का आयात बिल बढ़ा है, जिससे डॉलर की मांग और बढ़ी और रुपये पर दबाव पड़ा।

    विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

    आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 13 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.052 अरब अमेरिकी डॉलर घटकर 709.759 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया। इस कमी के कारण रुपये की कमजोरी और बढ़ी।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts