यूपी में वोटर लिस्ट से नाम हटाने की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की जांच और सुधार के लिए चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के दौरान Form 7 के कथित दुरुपयोग का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बड़ी संख्या में Form 7 जमा कर मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की कोशिश के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है। शुक्रवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आयोग से शिकायतों की जांच करने, जरूरी सुधार करने और कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से उन मामलों का विवरण चुनाव आयोग को देने के लिए कहा, जिनमें गड़बड़ी की शिकायतों का अब तक समाधान नहीं हुआ है। बेंच ने स्पष्ट किया कि आयोग इन शिकायतों की जांच करे और आवश्यक कार्रवाई की जानकारी अदालत को दे।
एक विधानसभा क्षेत्र में 32 Form 7 जमा करने का आरोप
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश के एक विधानसभा क्षेत्र में एक खास समुदाय के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटवाने के लिए 32 Form 7 जमा किए गए थे। याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताया कि कुछ फॉर्म पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे में दी गई जानकारी पर भी सवाल उठाए और कहा कि उसमें कई अंतर हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि तेलंगाना और कर्नाटक में ऐसे मामलों में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, जबकि उत्तर प्रदेश में कार्रवाई नहीं होने से इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा मिला।
चुनाव आयोग बोला- जांच में गलत पाए गए फॉर्म, किसी का नाम नहीं हटाया
चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट डीएस नायडू ने सुनवाई के दौरान माना कि बड़ी संख्या में Form 7 जमा किए गए थे। हालांकि उन्होंने कहा कि आयोग के अधिकारियों ने इन फॉर्म की जांच की और उन्हें गलत पाया। आयोग की ओर से बताया गया कि जांच के बाद इन फॉर्म के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया। डीएस नायडू ने कहा कि यदि किसी शिकायत में तथ्य हैं, तो संबंधित पक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराए। इसके बाद चुनाव आयोग मामले की जांच कर सकता है।
केरल में SIR की समयसीमा बढ़ाने से कोर्ट का इनकार
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केरल में SIR प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने या उसमें सुधार से जुड़े मामले अभी लंबित हैं, वे अपनी शिकायत चुनाव आयोग के सामने रख सकते हैं। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे लोगों की जानकारी आयोग तक पहुंचाई जाए, जिन्हें अभी भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। चुनाव आयोग इन शिकायतों की जांच करेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले पर आगे भी नजर रखेगा।
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यूपी कांग्रेस ने भी उठाए थे वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप
इससे पहले यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया था कि मतदाता सूची में जिन नामों के साथ छेड़छाड़ हुई है, उनमें से ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोगों के हैं। इस संबंध में कांग्रेस ने वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए थे।




















