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Aakash Waghmare
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दमोह। नवाचार जब सोच बदल दे तो छोटे प्रयोग भी बड़ी मिसाल बन जाते हैं। दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर ने कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है-अब चाय पीने के बाद कप फेंकने की जरूरत नहीं, क्योंकि कप भी खाने योग्य है। एडिबल कप के उपयोग के जरिए कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था का संदेश दिया।

दरअसल कलेक्टर बंगले के 100 वर्ष पूर्ण होने पर नए साल के पहले दिन गुरुवार को दमयंती व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। इसी मंच से चाय-कॉफी के लिए खाने योग्य कप का इस्तेमाल कर इस नवाचार की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में जीवन, तनाव और समय प्रबंधन पर मोटिवेशनल स्पीकर मनीषा आनंद का व्याख्यान हुआ। इस बीच इस नवाचार ने लोगों का ध्यान खींचा। कार्यक्रम में मौजूद विधायक जयंत मलैया, पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष मंजू धर्मेंद्र कटारे आदि ने कलेक्टर के इस नवाचार को सराहा।
बिस्किट और वेफर से बने ये एडिबल कप पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल हैं। चाय या कॉफी पीने के बाद इन्हें खाया जा सकता है या ये स्वयं नष्ट हो जाते हैं। कलेक्टर ने कहा, यह नवाचार सिंगल यूज प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने 31 दिसंबर को घोघरा गांव में रात्रि चौपाल लगाई। यहां उन्होंने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही अधिकारियों को निराकरण के निर्देश दिए। यह दौरा कुम्हारी में हुए जिला पंचायत सदस्य उपचुनाव के बाद हुआ। ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण मतदान का बहिष्कार कर दिया था। इस पर कलेक्टर कोचर घोघरा गांव पहुंचे थे और ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि वे 31 दिसंबर को उनके गांव में पूरी रात रहेंगे और अफसरों के साथ बैठकर एक-एक समस्या का निराकरण करेंगे।
प्रशासन का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि नए प्रयोगों के जरिए समाज को दिशा देना है। दमोह में शुरू हुआ यह प्रयोग एक संदेश बन गया है कि पर्यावरण बचाने के लिए बड़े आंदोलन नहीं, सही नवाचार की जरूरत है।
सुधीर कोचर, कलेक्टर, दमोह