दरअसल, बुलेट एंट दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक चींटी प्रजातियों में गिनी जाती है। इसके डंक को दर्द मापने वाले श्मिट स्टिंग पेन इंडेक्स में सबसे ऊंचा दर्जा मिला हुआ है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बुलेट एंट का डंक किसी भी दूसरे कीट के डंक से कहीं ज्यादा दर्दनाक होता है। यह दर्द इतना तेज और असहनीय होता है कि पीड़ित को घंटों तक तेज जलन और पीड़ा महसूस होती रहती है। यही वजह है कि इस चींटी को दुनिया की सबसे खतरनाक चींटियों में शामिल किया जाता है।
पसीना और भयानक कंपन से गुजरते हैं 24 घंटे
बुलेट एंट का जहर सीधे इंसान के सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर असर करता है। इसके डंक से हड्डियों में ड्रिल होने जैसा तेज दर्द महसूस होता है। साथ ही शरीर में तेज कंपन, बहुत ज्यादा पसीना और कई बार मतिभ्रम (Hallucinations) भी होने लगते हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, यह दर्द मधुमक्खी के डंक जैसा नहीं है, जो कुछ मिनटों में खत्म हो जाए। बुलेट एंट के डंक का असर करीब 24 घंटे तक हड्डियों के अंदर तक महसूस हो सकता है। इसके बावजूद ब्राजील की सातेरे-मावे ट्राइब में युवाओं को मर्दानगी साबित करने के लिए ऐसी चींटियों से भरे दस्तानों में अपने हाथ डालने पड़ते हैं। यही कठिन परीक्षा उन्हें जनजाति में सम्मान और पहचान दिलाती है।
बेहद डरावनी है बनाने की तैयारी
इस खौफनाक परंपरा की तैयारी भी उतनी ही डरावनी होती है। सातेरे-मावे ट्राइब के बुजुर्ग सबसे पहले जंगल से बुलेट एंट चींटियों को इकट्ठा करते हैं। इसके बाद उन्हें काजू की पत्तियों से बने मिश्रण से कुछ समय के लिए बेहोश किया जाता है, ताकि उन्हें खास दस्तानों में बुना जा सके। इन दस्तानों को इस तरह तैयार किया जाता है कि सभी चींटियों के डंक अंदर की ओर रहें। जैसे ही चींटियों पर चढ़ा नशा उतरता है, वे बेहद आक्रामक हो जाती हैं। इसके बाद 12 साल से ऊपर के लड़कों को एक-एक करके अपने हाथ इन दस्तानों के अंदर डालने होते हैं।













