AI समिट के दौरान भारत मंडपम के बाहर प्रदर्शन करने वाले यूथ कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को शनिवार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने चारों को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया और उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
कोर्ट में पेश किए गए आरोपी हैं- कृष्णा हरि, कुंदन यादव, अजय कुमार और नरसिम्हा यादव। पुलिस ने पांच दिन की पूछताछ के लिए रिमांड मांगी। बचाव पक्ष ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन बताया और रिमांड का विरोध किया।
दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 132 समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। ये सभी धाराएं सात साल से कम सजा वाली हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन ऐसी जगह हुआ, जहां विदेशी प्रतिनिधि मौजूद थे।
पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि प्रदर्शन के दौरान आरोपियों ने देश विरोधी और विभाजनकारी नारे लगाए। आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री की तस्वीर वाली टी-शर्ट लहराई और रोकने पर पुलिसकर्मियों को धक्का दिया, जिससे 3-4 जवान घायल हुए।
सरकारी वकील ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं और वे अलग-अलग राज्यों के निवासी हैं। जांच के लिए उनके राज्यों में जाकर साजिश, फंडिंग और टी-शर्ट छपाई की पड़ताल की जाएगी।
आरोपियों के वकील ने अदालत में कहा कि चारों कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने तर्क दिया कि किसी को चोट पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं है।
वकील ने कहा कि विरोध प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है और रिमांड की मांग अनावश्यक है। अगर प्रदर्शन के आधार पर गिरफ्तारी होती है, तो संसद में विरोध करने वाले नेताओं पर भी यही कार्रवाई होनी चाहिए।
चारों आरोपियों ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की। बचाव पक्ष ने कहा कि सभी युवा हैं और उनका भविष्य दांव पर है। दिल्ली पुलिस ने जमानत का विरोध किया और आगे की पूछताछ की जरूरत बताई। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिमांड और जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा।
इस दौरान राजधानी में राजनीतिक माहौल भी गरम रहा। बताया गया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया। कुछ कार्यकर्ता आरएएफ बैरिकेडिंग तोड़कर कांग्रेस मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे।