इंदौर किडनैपिंग कांड का खौफनाक सच: डेढ़ लाख के कर्ज ने बनाया दरिंदा
बेरोजगारी और कर्ज में डूबे युवाओं ने 15 लाख की फिरौती के लिए मासूम बच्चों का अपहरण किया। पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग और एसीपी की रणनीति से महज कुछ घंटों में आरोपियों को पकड़कर बच्चों को सुरक्षित छुड़ाया, जिससे सनसनीखेज साजिश का पर्दाफाश हुआ।
इंदौर के ग्रेटर तिरुपति गार्डन में हुए सनसनीखेज अपहरण कांड में अब ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जो इस पूरी साजिश की भयावह मानसिकता को उजागर करते हैं। महज डेढ़ लाख रुपये के कर्ज ने आरोपी विनीत प्रजापति को अपराध की अंधेरी दुनिया में धकेल दिया, जहां उसने मासूम बच्चों को आसान शिकार समझकर हैवानियत भरी योजना रच डाली। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि घटना वाले दिन गार्डन में सिर्फ राधिका मौजूद थी, जो कई दिनों से बच्चों के बीच भरोसा बनाने के लिए आ-जा रही थी। उसने टॉफी और जान-पहचान का झांसा देकर बच्चों को बहलाया और मौके से लेकर फरार हो गई, जबकि दूसरी तरफ विनीत पर्दे के पीछे बैठकर व्हाट्सएप कॉल के जरिए 15 लाख की फिरौती मांगता रहा।
नंबर पर धमकी दे रहा है, वह पुलिस के पास था
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि विनीत को अंदाजा तक नहीं था कि वह जिस नंबर पर धमकी दे रहा है, वह पुलिस के नियंत्रण में है। इधर, पुलिस ने देरी से मिली सूचना के बावजूद तेजी दिखाते हुए तकनीकी जाल बिछाया और कुछ ही घंटों में बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया। जांच में यह भी सामने आया कि विनीत लंबे समय से अपने पालतू खतरनाक कुत्ते (रोटवीलर) को लेकर उसी गार्डन में आता था और बच्चों से घुल-मिलकर उन्हें अपने करीब लाता था। बच्चे उसके कुत्ते के साथ खेलने के लालच में उससे जुड़ गए, जिसका फायदा उठाकर उसने पूरी साजिश को अंजाम दिया।
आरोपी की निजी जिंदगी भी अपराध की जमीन बन चुकी थी। बीमारी के बाद परिवार ने उसे घर से निकाल दिया था, किराया बकाया था, नौकरी छूट चुकी थी और आर्थिक तंगी ने उसे बुरी तरह तोड़ दिया था। उसकी बहन राधिका, जो पहले फ्लिपकार्ट में काम करती थी, वह भी बेरोजगार हो चुकी थी। इसी हताशा और लालच में आकर दोनों ने अपने साथियों ललित सेन और तनिष्का सेन के साथ मिलकर किडनैपिंग का खतरनाक प्लान तैयार किया। यह पूरा मामला साफ करता है कि कैसे छोटी आर्थिक परेशानी ने एक साधारण युवक को संगठित अपराधी बना दिया और मासूम बच्चों की जिंदगी दांव पर लगा दी। पुलिस अब इस गिरोह के हर पहलू की जांच कर रही है, ताकि इस तरह की साजिशों की जड़ तक पहुंचा जा सके।
बल्कि बेरोजगारी और कर्ज में डूबे युवा थे
खौफनाक किडनैपिंगबल्कि बेरोजगारी और कर्ज में डूबे युवा थे का मास्टरमाइंड कोई पेशेवर गैंग नहीं, , जिन्होंने पैसों की हवस में इंसानियत को कुचल दिया। मुख्य आरोपी राधिका, जो ई-कॉमर्स कंपनी में काम करती थी, अपने भाई विनीत प्रजापति और साथियों के साथ मिलकर बच्चों को आसान शिकार समझ बैठी। पलासिया थाना क्षेत्र से 11 वर्षीय सम्राट और नैतिक को एक युवती ने बगीचे से बहला-फुसलाकर अगवा किया और फिर 15 लाख रुपये की फिरौती की मांग शुरू कर दी। आरोपियों ने मासूमों की जान की परवाह किए बिना परिजनों को धमकियां दीं—यहां तक कि बच्चों को काटकर फेंक देने की बात तक कह डाली। इस निर्ममता ने पूरे मामले को और भयावह बना दिया।
एसीपी तुषार सिंह की सूझबूझ यहां निर्णायक साबित
पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर जोन-3 की टीमों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। एसीपी तुषार सिंह की सूझबूझ यहां निर्णायक साबित हुई। उन्होंने पीड़िता की मां बनकर आरोपियों से व्हाट्सएप पर बातचीत जारी रखी और उन्हें विश्वास में लेकर समय हासिल किया। इसी दौरान साइबर एक्सपर्ट्स ने लोकेशन ट्रेस कर घेराबंदी कर दी। दत्तनगर के शिवांस अपार्टमेंट में पुलिस ने दबिश देकर चारों आरोपियों—राधिका, उसका भाई विनीत, ललित सेन और उसकी पत्नी तनिषा—को धर दबोचा और दोनों बच्चों को सकुशल मुक्त करा लिया। गिरफ्तारी के दौरान भागने की कोशिश में आरोपी घायल भी हुए।