हर आरोप पर सिर्फ जांच... फिर एसआई पर क्यों नहीं आती आंच? पुराने सुसाइड केस के बाद अब ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग में नया विवाद

इंदौर। लसूड़िया थाना क्षेत्र में ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग के दौरान एक महिला और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद में सब इंस्पेक्टर महेश चौहान का नाम सामने आने के बाद उनके पुराने मामलों की भी चर्चा शुरू हो गई है। वर्ष 2023 में भंवरकुआ क्षेत्र के एक होटल में मोबाइल व्यापारी के आत्महत्या मामले में भी एसआई महेश चौहान का नाम सामने आया था।
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लसूड़िया में चेकिंग के दौरान विवाद
लसूड़िया इलाके में दो दिन पहले देर रात ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग चल रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम ने विजय सोनाने को रोका। आरोप है कि पुलिस ने उनकी कार जब्त कर चालानी कार्रवाई करने की बात कही।
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रसीद मांगे जाने की बात कहती दिखाई दे रही है।
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पुलिस बोली- वीडियो की जांच के बाद होगा खुलासा
मामले में एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
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एसआई का दावा- महिला बेवजह विवाद कर रही थी
एसआई महेश चौहान की ओर से सामने आए पक्ष में आरोपों को निराधार बताया गया है। उनका कहना है कि महिला बेवजह विवाद करने आई थी और खुद को पत्रकार बता रही थी।
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2023 के व्यापारी सुसाइड केस में भी सामने आया था नाम
लसूड़िया के ताजा विवाद के बाद वर्ष 2023 का एक पुराना मामला फिर चर्चा में आ गया है। भंवरकुआ क्षेत्र स्थित द ग्रैंड होटल के एक कमरे में मोबाइल व्यापारी राजीव शर्मा ने आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पास से पांच पन्नों का कथित सुसाइड नोट मिला था। सुसाइड नोट में उसने तत्कालीन एसआई महेश चौहान और आरक्षक प्रशांत सिंह परिहार पर प्रताड़ित करने और झूठे मामलों में फंसाने सहित कई गंभीर आरोप लगाए थे।
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‘पता है केस फर्जी है, 25 लाख दो खत्म कर दूंगा’
सुसाइड नोट में मृतक ने आरोप लगाया था कि उसके खिलाफ दर्ज मामले को लेकर उससे कथित रूप से लाखों रुपये की मांग की गई थी। नोट के अनुसार, उसने दावा किया था कि जब उसने पुलिस अधिकारी से कहा कि मामले में इस्तेमाल किए गए स्टाम्प और दस्तावेज फर्जी हैं, तो कथित तौर पर उससे कहा गया कि मामला खत्म करने के लिए 25 लाख रुपये देने होंगे।
आरक्षक पर भी लगाए थे रुपये लेने के आरोप
मृतक ने सुसाइड नोट में आरक्षक प्रशांत सिंह परिहार के साथ अपने पुराने आर्थिक लेन-देन का भी जिक्र किया था। उसने दावा किया था कि उसने प्रशांत और उसके परिवार से रुपये लिए थे, जिन्हें बाद में चुका दिया गया। नोट में यह आरोप लगाया गया था कि भुगतान पूरा होने के बावजूद उससे लगातार रुपये मांगे जाते रहे। मृतक ने यह भी लिखा था कि कथित दबाव और धमकियों के कारण वह परेशान था।
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पुराने मामले में हुई थी कार्रवाई
मोबाइल व्यापारी आत्महत्या मामले में आरक्षक प्रशांत सिंह परिहार के खिलाफ कार्रवाई हुई थी और उसे जेल भी जाना पड़ा था। बाद में वह जमानत पर बाहर आ गया। वहीं, एसआई महेश चौहान को लेकर भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई और जांच की चर्चा रही। आरोपों के बाद उन्हें लाइन अटैच या निलंबित किए जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में वे दोबारा सेवा में लौट आए।
सवाल फिर वही- हर बार जांच, लेकिन जिम्मेदारी किसकी?
लसूड़िया में सामने आए ताजा विवाद और पुराने आत्महत्या मामले के आरोपों के बीच पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। किसी पुलिसकर्मी पर गंभीर आरोप लगने के बाद जांच शुरू होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सवाल यह है कि जांच कितनी निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से पूरी होती है और उसकी अंतिम जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।




















