बालाघाट में मलेरिया का कहर: 3 दिन में दूसरी मौत, अब तक 26 बच्चों की जान गई

बालाघाट में मलेरिया से बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री के दौरे से पहले परसवाड़ा के मोहनपुर पंचायत की 10 वर्षीय काजल गोंदिया की गोंदिया के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। बच्ची का शव लेकर परिजन एम्बुलेंस से घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक सरकारी जीप ने एम्बुलेंस का पीछा किया।
रिपोर्टर को परिजनों से बात करने से रोका
बताया जा रहा है कि दैनिक भास्कर के रिपोर्टर ने एम्बुलेंस रोककर परिजनों से बात करने की कोशिश की। इस दौरान सरकारी जीप में मौजूद टीम ने कथित तौर पर एम्बुलेंस चालक को डांट-फटकार लगाई। जीप में मौजूद महिलाओं ने मीडिया से बात नहीं की और वाहन का गेट बंद कर एम्बुलेंस का पीछा करना जारी रखा। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
तीन दिन में मलेरिया से दूसरी मौत
मोहनपुर पंचायत में तीन दिनों के भीतर मलेरिया से यह दूसरी मौत है। इससे दो दिन पहले बैगाटोला में लवकुश मरकाम की मलेरिया से मौत हुई थी। उस मामले में भी परिजनों ने आरोप लगाया था कि प्रशासन की टीम उनके घर पहुंचने से पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
24 अगस्त को मलेरिया की पुष्टि
जानकारी के अनुसार, काजल को 24 अगस्त को मलेरिया होने का पता चला था। 27 अगस्त को परिजन उसे बालाघाट के एक निजी केयर हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। हालत में सुधार नहीं होने पर उसे गोंदिया के यूनाइटेड अस्पताल ले जाया गया, जहां शनिवार सुबह उसकी मौत हो गई।
अब तक 26 बच्चों की मौत का दावा
बालाघाट जिले के बैहर और परसवाड़ा के आदिवासी क्षेत्रों में मलेरिया, खसरा, त्वचा संबंधी बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन इलाकों में अब तक 26 बच्चों की मौत हो चुकी है।
एम्बुलेंस रोकने को लेकर फोन आने का दावा
काजल के चाचा के मुताबिक, बेटी का शव लेकर लौटते समय एम्बुलेंस चालक के पास फोन आया था। उन्हें कथित तौर पर कहा गया कि एम्बुलेंस को रास्ते में कहीं नहीं रोकना है। इसके बाद सरकारी जीप द्वारा एम्बुलेंस का पीछा किए जाने की बात सामने आई है। घटना को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।




















