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ऑपरेशन मनी ट्रैप-पैसे दोगुने करने का झांसा देकर 2 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

राजगढ़ पुलिस ने ब्यावरा में 2 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा करते हुए ‘ऑपरेशन मनी ट्रैप’ के तहत अंतरराज्यीय गिरोह के 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 10 राज्यों में दबिश देकर 1.73 करोड़ रुपये नकद समेत 2.92 करोड़ रुपये से अधिक की सामग्री बरामद की। गिरोह निवेश की रकम दोगुनी करने का झांसा देता था।
ऑपरेशन मनी ट्रैप-पैसे दोगुने करने का झांसा देकर 2 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश
राजगढ़ पुलिस, जब्त की हुई रकम के साथ।

राजगढ़। पुलिस ने ब्यावरा सिटी थाना क्षेत्र में हुई 2 करोड़ रुपये की सनसनीखेज ठगी के मामले का खुलासा करते हुए एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पदार्फाश किया है। ‘ऑपरेशन मनी ट्रैप’ के तहत पुलिस ने 10 राज्यों में दबिश देकर गिरोह के 14 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 1.73 करोड़ रुपये नकद, 4 वाहन और 19 एंड्रॉइड मोबाइल सहित कुल 2.92 करोड़ रुपये से अधिक का सामान जब्त किया है। 

निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच

पुलिस के अनुसार, ब्यावरा शहर निवासी देवेन्द्र  पालीवाल ने  बीते 24 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि प्रफुल्ल गजभिये ने खुद को बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच दिया। फरियादी को विश्वास में लेने के लिए भोपाल एवं ब्यावरा स्थित होटल प्रेसिडेंट एवं होटल रेडिएंट में आरोपियों ने मुलाकात की। इन बैठकों में कंपनी, निवेश योजना एवं राशि के संबंध में चर्चा कर फरियादी को निवेश के लिए आश्वस्त किया गया। इसके बाद 22 जुलाई को भोपाल के जहांगीराबाद स्थित बाबूलाल कांतीलाल कूरियर ऑफिस में फरियादी से 2 करोड़ की राशि प्राप्त की गई। जांच में सामने आया कि अंगड़िया हेड आरिफ हुसैन के कहने पर सन्नी उर्फ शमीम मंडल एवं मुस्कीम मंडल राशि लेने के लिए जहांगीराबाद पहुंचे थे। दोनों ने फरियादी से 2 करोड़ की नकद राशि प्राप्त की और उसे विश्वास में रखने के लिए 4 करोड़ के आरटीजीएस का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर वहां से फरार हो गए। जांच में आरिफ हुसैन, नवीन जैन, कांतीलाल उर्फ कमल, अशोक चौधरी एवं बोनी यामीन की भूमिका राशि को महाराष्ट्र से अलग-अलग व्यक्तियों एवं स्थानों तक पहुंचाने, बांटने तथा खपाने में सामने आई है।

3000 से अधिक सीसीटीवी फुटेज खंगाले

 राजगढ़ एसपी अमित तोलानी ने आरोपियों की गिरफ्तारी एवं ठगी की राशि की बरामदगी के लिए 50 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों की 10 टीमें बनार्इं थीं।   ठगी की रकम को आरोपियों ने हवाला और आंगड़िया नेटवर्क के जरिए देश के अलग-अलग राज्यों में ट्रांसफर कर दिया था। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने प. बंगाल और दिल्ली में भी 50-50 लाख रुपये की ठगी की। एसपी के निर्देशन में चली इस कार्रवाई में पुलिस टीम ने एक महीने तक लगातार अभियान चलाया। आरोपियों को दबोचने के लिए पुलिस ने लगभग 30 हजार किलोमीटर तक पीछा किया और 3 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। 

ये आरोपी पकड़े गए

आरोपियों में आरिफ हुसैन ठाणे वेस्ट, अशोक चौधरी बोरीवली वेस्ट, नवीन जैन जोधपुर, सन्नी उर्फ शमीम मंडल,  मुस्कीम मंडल, बोनी यामीन सभी निवासी मुर्शिदाबाद, प. बंगाल, कांतीलाल माली, हैदराबाद, वासुदेव गाडेकर, पुणे, दिनेश वीरानी, प्रफुल्ल गजभिये और सचित कामले, नागपुर, सुजीत टेंबेकर गोंदिया, महाराष्ट्र,  माधव असोरे, नांदेड, महाराष्ट्र   और साहिल नीसवाडे, नागपुर शामिल हैं। 

कई स्तरों में बंटा था गिरोह का काम

पहला स्तर: मालदार लेकिन जरूरतमंद पीड़ित को चिह्नित करना।

दूसरा स्तर: परिचय कराना और पीड़ित का विश्वास जीतना। इसके लिए बड़ी कंपनी का नाम, महंगी गाड़ियां, होटल में बैठक और व्यवस्थित दस्तावेजों का सहारा लिया गया।

तीसरा स्तर: फर्जी ई-मेल, स्वीकृति-पत्र और भुगतान संदेश दिखाकर निवेश को वास्तविक सिद्ध करना।

चौथा स्तर: पीड़ित से अधिकतम नकद राशि प्राप्त करना, ताकि बैंकिंग माध्यम में तत्काल कोई रिकॉर्ड न बने।

पांचवां स्तर: नकद राशि को हवाला अथवा आंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तियों और शहरों तक पहुचाना।

अंतिम स्तर:  गिरोह के सदस्य राशि को आपस में बांटकर अपने ठिकाने, मोबाइल नंबर और शहर बदल देते थे।

विशेष बात यह है कि हर लिंक पर आरोपी अपना नाम छुपा कर ट्रेड नाम रखते हैं एवं एक व्यक्ति अपने से ऊपर की लिंक और नीचे की लिंक से ही जुड़ा है द्वितीय लिंक के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं होती है

आरोपियों की भूमिका

आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फरियादी को कंपनी में निवेश के नाम पर विश्वास में लेकर 2 करोड़ की राशि देने के लिए तैयार किया। माधव असोरे, जो कंपनी कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहा था तथा सुजीत टेम्बेकर एवं साहिल नीसवाडे ने फरियादी की तलाश एवं पहचान कर उसे गिरोह के संपर्क में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद प्रफुल्ल गजभिये एवं सचित कामले ने कंपनी के एजेंट के रूप में, दिनेश वीरानी ने कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में तथा वासुदेव गाडेकर ने कंपनी के डायरेक्टर के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर फरियादी से मुलाकात की। इन आरोपियों ने कंपनी एवं निवेश योजना को वास्तविक एवं विश्वसनीय बताते हुए फरियादी का विश्वास हासिल किया तथा उसे 2 करोड़ की राशि देने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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