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15 करोड़ हर महीने... बिजली कौन जला रहा, निगम को ही नहीं पता!

भोपाल से मंगाई गई कनेक्शनों की सूची, विभागवार सत्यापन शुरू; निजी उपयोग की आशंका पर होगी जांच
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बिजली कौन जला रहा, निगम को ही नहीं पता!
फाइल फ़ोटो

इंदौर। नगर निगम के खजाने पर हर महीने करीब 15 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ डालने वाले लगभग 8 हजार बिजली कनेक्शनों का पूरा रिकॉर्ड ही निगम के पास नहीं है। इन कनेक्शनों का बिजली बिल नियमित रूप से नगर निगम भर रहा है, लेकिन इनमें से कितने कनेक्शन वास्तव में निगम के उपयोग में हैं और कितनों का इस्तेमाल कोई अन्य व्यक्ति या संस्था कर रही है, इसका कोई पुख्ता सत्यापन उपलब्ध नहीं है। इस खुलासे के बाद निगम प्रशासन ने सभी बिजली कनेक्शनों का विभागवार सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है।

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जानकारी के अनुसार, नगर निगम के विद्युत विभाग, जल यंत्रालय, उद्यान विभाग, सार्वजनिक बोरिंग, सामुदायिक भवन, रैन बसेरों और अन्य इकाइयों के नाम पर हजारों बिजली कनेक्शन दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या स्ट्रीट लाइट और विद्युत विभाग के कनेक्शनों की है। इसके अलावा सार्वजनिक बोरिंग, उद्यानों की लाइट, सामुदायिक भवनों और रैन बसेरों के बिजली बिल भी निगम ही वहन करता है। इन सभी मदों पर हर महीने लगभग 15 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

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भोपाल से मंगाई गई पूरी सूची

नगर निगम के लेखा विभाग ने मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के भोपाल मुख्यालय से इंदौर में निगम के नाम दर्ज सभी बिजली कनेक्शनों की सूची मंगाई थी। सूची मिलने के बाद अब इसे संबंधित विभागों को भेजा जा रहा है। सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने बिजली कनेक्शनों का भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

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चुंगी क्षतिपूर्ति से भी कट रही राशि

लेखा विभाग के अनुसार, कई बार नगर निगम निर्धारित समय पर सभी बिजली बिलों का भुगतान नहीं कर पाता। ऐसे में बकाया राशि विद्युत कंपनी, भोपाल से नगर निगम को मिलने वाली चुंगी क्षतिपूर्ति (Compensation Grant) से काट लेती है। इसके अलावा हर महीने नर्मदा परियोजना के बिजली बिल के रूप में करीब 18 करोड़ रुपए पहले से ही इस मद से समायोजित किए जाते हैं। कई वर्षों से अतिरिक्त बिजली बिल भी इसी राशि से काटे जा रहे थे, जिसके बाद अब पूरे रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई है।

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लेखा विभाग के अपर आयुक्त देवघर दरवई ने बताया कि बिजली कनेक्शनों का सत्यापन इसलिए कराया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन-कौन से कनेक्शन वास्तव में नगर निगम के उपयोग में हैं और किनकी अब आवश्यकता नहीं है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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