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घटा भरोसा या बदली पसंद!सरकारी स्कूलों से घटे 86 लाख छात्र, आखिर क्यों बढ़ रहा है प्राइवेट स्कूलों का क्रेज?

शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट में सरकारी और निजी स्कूलों के दाखिले को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। पिछले दो वर्षों में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज हुई है, जबकि निजी स्कूलों में दाखिला बढ़ा है। रिपोर्ट ने देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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सरकारी स्कूलों से घटे 86 लाख छात्र, आखिर क्यों बढ़ रहा है प्राइवेट स्कूलों का क्रेज?
सरकारी स्कूलों से घटा दाखिला, निजी स्कूलों में संख्या बढ़ी।

नई दिल्ली। देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर शिक्षा मंत्रालय की ताजा UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो वर्षों में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में करीब 86 लाख की कमी आई है। दूसरी ओर निजी स्कूलों में छात्रों का दाखिला लगातार बढ़ा है। इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में अभिभावक अब अपने बच्चों के लिए निजी स्कूलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

सरकारी स्कूलों में लगातार कम हुए छात्र

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023-24 में सरकारी स्कूलों में लगभग 12.75 करोड़ छात्रों का नामांकन था। वर्ष 2025-26 तक यह संख्या घटकर करीब 11.89 करोड़ रह गई। यानी दो वर्षों में लगभग 86 लाख छात्रों की कमी दर्ज की गई। वहीं, इसी अवधि में निजी बिना सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ी है। पहले जहां इन स्कूलों में लगभग 9 करोड़ छात्र पढ़ रहे थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर करीब 9.89 करोड़ पहुंच गया है।

आखिर क्यों बढ़ रहा है निजी स्कूलों का आकर्षण

कई परिवार बेहतर पढ़ाई, अंग्रेजी माध्यम, सुविधाओं और अच्छे परीक्षा परिणामों को ध्यान में रखते हुए निजी स्कूलों का चयन कर रहे हैं। इसके अलावा डिजिटल क्लास, स्मार्ट लर्निंग, खेल और अन्य गतिविधियों जैसी सुविधाएं भी अभिभावकों को आकर्षित कर रही हैं। कई लोगों का मानना है कि निजी स्कूल बच्चों को प्रतियोगी माहौल देने में आगे हैं, इसलिए वहां दाखिले बढ़ रहे हैं।

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सरकारी स्कूलों में गिरावट के कई कारण

सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या कम होने का केवल एक कारण नहीं है। कई राज्यों में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का आपस में विलय किया गया है। इसके साथ ही आबादी में बदलाव और परिवारों के स्थान बदलने जैसी स्थितियों का भी असर नामांकन पर पड़ा है। कुछ क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों की संख्या कम होने और सुविधाओं में अंतर के कारण भी अभिभावकों ने निजी स्कूलों का विकल्प चुना है।

स्कूल छोड़ने की दर में आई कमी

रिपोर्ट में एक सकारात्मक बात भी सामने आई है। पिछले वर्षों की तुलना में स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। प्रीपरेटरी स्तर पर ड्रॉपआउट दर पहले के मुकाबले घट गई है। इसी तरह सेकेंडरी स्तर पर भी स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या कम हुई है। इससे संकेत मिलता है कि अब अधिक छात्र अपनी पढ़ाई जारी रख रहे हैं।

सरकार के लिए क्यों अहम है यह रिपोर्ट

शिक्षा मंत्रालय की यह रिपोर्ट आने वाले समय में शिक्षा नीतियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें इन आंकड़ों का अध्ययन कर सरकारी स्कूलों की स्थिति मजबूत करने के लिए नए कदम उठा सकती हैं। सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। इससे अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और अधिक छात्र सरकारी स्कूलों की ओर लौट सकते हैं।

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ग्रामीण इलाकों में भी बदल रही तस्वीर

यह बदलाव केवल बड़े शहरों तक नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी निजी स्कूलों का विस्तार तेजी से हो रहा है। कम फीस वाले निजी स्कूल खुलने से गांवों के कई परिवार भी अब अपने बच्चों को निजी संस्थानों में भेज रहे हैं। 

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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