इंदौर में मेट्रो चली, लेकिन यात्री नहीं बढ़े! 75 हजार सवारियों से 30 लाख कमाई, अब पास से उम्मीद

इंदौर। इंदौर की मेट्रो को दौड़ते एक महीना पूरा हुआ, लेकिन यात्रियों की संख्या अभी उम्मीद के मुताबिक रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। 17 किलोमीटर के एलिवेटेड कॉरिडोर पर पिछले 30 दिनों में करीब 75 हजार यात्रियों ने सफर किया। इससे मेट्रो कॉर्पोरेशन को लगभग 30 लाख रुपए की आय हुई। शुरुआती आंकड़े उत्साह बढ़ाने वाले जरूर हैं, लेकिन संचालन खर्च के मुकाबले कमाई अभी काफी कम है।
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शुरुआत में भीड़, फिर घट गई रफ्तार
गांधीनगर से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो सेवा 6 सितंबर से शुरू हुई थी। पहले दिन करीब 6 हजार यात्रियों ने सफर किया, लेकिन बाद में रोजाना यात्रियों की संख्या औसतन ढाई हजार के आसपास रह गई। छुट्टी और रविवार को यह आंकड़ा करीब 5 हजार तक पहुंच जाता है। मेट्रो का अनुभव लेने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग वीकेंड पर सफर कर रहे हैं।
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20 से 70 रुपए तक किराया, अब पास से राहत
मेट्रो में एक तरफ का किराया 20 से 70 रुपए तक है। नियमित यात्रियों को राहत देने के लिए वापसी टिकट पर 5 प्रतिशत, ग्रुप बुकिंग पर 10 प्रतिशत और मोबाइल एप से वॉलेट रिचार्ज पर 8 से 15 प्रतिशत तक लाभ दिया जा रहा है। अब रोजाना आने-जाने वालों के लिए मासिक पास योजना शुरू करने की तैयारी है।
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एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से बढ़ेगी उम्मीद
मेट्रो की कम सवारी का सबसे बड़ा कारण अभी सीमित कनेक्टिविटी को माना जा रहा है। एयरपोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी मिलने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। एयरपोर्ट से गांधीनगर के बीच अंडरग्राउंड रूट के लिए टीबीएम ने खुदाई शुरू कर दी है। दूसरी ओर निगम मुख्यालय-शिवाजी मार्केट की तरफ से टीबीएम राजवाड़ा होते हुए बड़ा गणपति तक अंडरग्राउंड लाइन के लिए काम शुरू करेगी।
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पार्किंग भी बनी परेशानी
यात्रियों के सामने सिर्फ किराए का मुद्दा नहीं है। कई स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा पर्याप्त नहीं है। फिलहाल चुनिंदा स्टेशनों पर ही पार्किंग उपलब्ध है। ऐसे में मेट्रो को रोजमर्रा की यात्रा का प्रमुख साधन बनाने के लिए किराए में राहत, पार्किंग और बेहतर कनेक्टिविटी,तीनों मोर्चों पर काम करना होगा।
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