भोपाल में शिक्षक भर्ती पद वृद्धि की मांग को लेकर अनशन खत्म, जीतू पटवारी ने नारियल पानी पिलाकर कराया समाप्त

भोपाल। शिक्षक भर्ती वर्ग-2 और वर्ग-3 में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर भोपाल में डीपीआई कार्यालय के बाहर चल रहा युवाओं का भूख हड़ताल आंदोलन गुरुवार को समाप्त हो गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी आंदोलन कर रहे युवाओं के बीच पहुंचे और उनसे बातचीत कर अनशन खत्म कराया। उन्होंने आंदोलनकारी युवाओं को नारियल पानी पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराई।
18 दिन से चल रहा था आंदोलन
जीतू पटवारी ने कहा कि युवाओं का आंदोलन 18 दिन से चल रहा था लेकिन सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी युवाओं से मिलकर उन्हें समझाना और उनका अनशन खत्म कराना उनकी जिम्मेदारी थी। पटवारी ने कहा कि इस मुद्दे को कांग्रेस के विधायक विधानसभा में भी उठाएंगे। उन्होंने सरकार से शिक्षक भर्ती में पद वृद्धि को लेकर बड़े मन और उदारता के साथ न्यायसंगत फैसला लेने की अपील की।
तीन लाख शिक्षक पद खाली हैं
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन कर रहे युवा प्रदेश के परिवार का हिस्सा हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश में शिक्षकों के करीब तीन लाख पद खाली हैं। ऐसे में शिक्षक भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाने से सरकार पर ऐसा कोई बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो। पटवारी ने कहा कि सरकार हेलिकॉप्टर, हवाई जहाज और दूसरी व्यवस्थाओं के लिए कर्ज ले रही है तो शिक्षकों के पद बढ़ाने के लिए भी संसाधन जुटाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बजट की कमी का हवाला देती है, जबकि मध्य प्रदेश में करीब 25 साल से बीजेपी की सरकार है।
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सरकार को बड़े मन से फैसला लेना चाहिए
पटवारी ने कहा कि जब सरकार कर्ज लेकर व्यवस्थाएं चला रही है तो शिक्षकों की भर्ती के लिए बजट बढ़ता है तो इसमें कोई बुराई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाते हुए युवाओं के हित में फैसला लेने की अपील की। डीपीआई कार्यालय के बाहर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों से बातचीत के दौरान पटवारी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी शिक्षकों की पीड़ा को समझा है और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग की है।
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शिक्षा को आंदोलन बनने से रोकना जरूरी
जीतू पटवारी ने कहा कि शिक्षकों को आंदोलनकारी बनाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा का क्षेत्र लगातार आंदोलन का केंद्र बनता है तो यह देश और प्रदेश के लिए गंभीर स्थिति होगी।


















