गांधी भवन में ‘ब्लॉक अध्यक्षों की गूंज’, बिगड़ी व्यवस्थाओं पर उठे सवाल तो बोलीं ऊषा नायडू-शिकायतें कांग्रेस कार्यसमिति में रखेंगी

इंदौर। राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद अब कांग्रेस के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई है। गांधी भवन में रविवार को दोपहर में सहप्रभारी ऊषा नायडू की मौजूदगी में ब्लॉक अध्यक्षों, वार्ड अध्यक्षों और बाद में शहर कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक संगठन की समीक्षा से आगे बढ़कर कार्यकर्ताओं की शिकायतों का मंच बन गई। कई मौकों पर हंगामे की स्थिति भी बनी।
राहुल गांधी से नहीं मिल पाने की शिकायत
कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी नाराजगी राहुल गांधी से मुलाकात नहीं होने को लेकर नहीं थी। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि जो नेता और उनके करीबी कांग्रेस के कार्यक्रमों और आंदोलनों में दिखाई तक नहीं देते, वे राहुल गांधी के कार्यक्रम में पास बांटते नजर आए। कार्यकर्ताओं ने संगठन के सामने सवाल रखा कि पार्टी के निर्देश पर जमीन पर काम करने वालों के लिए नियम अलग और कार्यक्रम के दौरान प्रभावशाली लोगों के लिए अलग व्यवस्था क्यों रही?
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‘नियम तोड़ने वालों पर हो कार्रवाई’
बैठक में कई कार्यकर्ताओं ने मांग रखी कि जिन नेताओं ने तय नियमों का उल्लंघन किया, उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि कार्यक्रमों और आंदोलनों को जमीन पर खड़ा करने वाले कार्यकर्ताओं की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बढ़ती नाराजगी को देखते हुए ऊषा नायडू ने कार्यकर्ताओं की बातें सुनीं। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायतों को आगे रखा जाएगा। साथ ही पूरा मामला कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में रखने की बात कही। इससे स्थानीय स्तर पर उठी नाराजगी के संगठन के बड़े मंच तक पहुंचने के संकेत मिले हैं।
सफल आयोजन के बाद उठे संगठन पर सवाल
कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ को सफल आयोजन माना है, जिसमें छात्रों की आवाज राहुल गांधी तक पहुंची, लेकिन आयोजन के बाद गांधी भवन में कार्यकर्ताओं की आवाज उठने से संगठन के भीतर नई चर्चा शुरू हो गई है। अब सवाल यह है कि कार्यक्रम को जमीन पर खड़ा करने वाले कार्यकर्ताओं की शिकायतों को संगठन कितनी गंभीरता से लेता है और नियमों के उल्लंघन की शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है।
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