स्टडी के अनुसार एयरपोर्ट पर हर साल करीब 14 प्रतिशत की दर से यात्री बढ़ रहे हैं और अगले 10 साल में संख्या 1 करोड़ पार कर सकती है। मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही दबाव में है, ऐसे में विस्तार जरूरी बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर एयरपोर्ट पर यात्री संख्या में हर साल करीब 14 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है। यही रफ्तार जारी रही तो अगले 10 वर्षों में यहां से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 1 करोड़ के पार पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा टर्मिनल, रनवे और अन्य सुविधाएं पहले ही सैचुरेशन पॉइंट के करीब हैं। ऐसे में भविष्य का दबाव संभालना मुश्किल होगा। जहां देश के अन्य एयरपोर्ट्स पर वृद्धि दर 7-8% है, वहीं इंदौर में यह लगभग दोगुनी है। अनुमान है कि अगले 5 साल में ही यात्री संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है।
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रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि फार्मास्यूटिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी से बढ़ते इंदौर के लिए एयर कार्गो की सीमित क्षमता एक बड़ी बाधा बन सकती है। पर्याप्त कोल्ड-चेन और आधुनिक कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में निर्यात प्रभावित हो सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की सीमित संख्या भी शहर की वैश्विक कनेक्टिविटी को कमजोर करती है। बता दें कि मध्य प्रदेश सरकार ने 2028-29 तक जीएसडीपी दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन एयरपोर्ट विस्तार नहीं हुआ तो यह लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।
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स्टडी में एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के तत्काल विस्तार की जरूरत बताई गई है। इसके साथ ही मल्टी-एयरपोर्ट सिस्टम विकसित करने, अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने और आधुनिक कार्गो और कोल्ड-चेन नेटवर्क तैयार करने की सिफारिश की गई है। 'एयरोट्रोपोलिस' मॉडल अपनाने और पीपीपी मॉडल के जरिए निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। डिजिटल अपग्रेडेशन और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की भी जरूरत बताई गई है। साथ ही जमीन और पर्यावरण समस्याओं के समाधान को अहम माना गया है। बता दें कि जानकारी के अनुसार सांसद शंकर ललवानी के पत्र के आधार पर आईआईएम ने यह स्टडी की है।
रिपोर्ट के अनुसार एयरपोर्ट अब केवल परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक विकास की रीढ़ बन चुका है। इंदौर में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा असर व्यापार और उद्योग पर पड़ता है। आईआईएम डायरेक्टर डॉ. हिमांशु राय ने कहा कि रिपोर्ट तैयार कर सौंपी जा चुकी है और इसमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में शहर की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।