ऑनलाइन मंगाया सामान वजन में आया कम :आयोग ने लगाया जुर्माना, दो बार रिटर्न के बाद भी बनी रही समस्या

वहीं, जब मामला राज्य आयोग के पास पहुंचा तो यहां आयोग ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भले ही एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करता हो, लेकिन यदि उसके सामने बार-बार शिकायतें लाई जाती हैं, तो वह पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।
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आयोग ने लगाया जुर्माना, दो बार रिटर्न के बाद भी बनी रही समस्या
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पीपुल्स संवाददाता, भोपाल। विज्ञापन या वेबसाइट पर शो की जा रही मात्रा से कम मात्रा में उत्पाद देना, अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में है। राज्य उपभोक्ता आयोग ने भोपाल से जुड़े ऐसे ही एक मामले में ई-कॉमर्स कंपनी और निर्माता पर जुर्माना लगाया है। बता दें, मामले में पहले जिला आयोग ने केवल निर्माता कपंनी पर जुर्माना लगाया था, लेकिन उपभोक्ता द्वारा राज्य आयोग में शिकायत के बाद ई-कॉमर्स कंपनी को भी जिम्मेदार माना गया।

    यह है मामला

    उपभोक्ता अंकित सिंह ने अपने आवेदन में बताया कि उन्होंने फ्लिपकार्ट से मिलेट्स युक्त कुछ खाद्य सामग्री मंगाई थी। उन्होंने साल 2024 में यह सामान मंगाया था। हालांकि उन्हें दो किलो की जगह केवल 1600 ग्राम उत्पाद मिलिा। उपभोक्ता ने इसकी शिकायत की और रिटर्न की प्रोसेस की इसके बाद एक्सचेंज में उन्हें जो प्रोडक्ट मिला वह भी दो सौ ग्राम कम था। दूसरी बार फिर रिप्लेसमेंट के बाद भी प्रोडक्ट केवल 1700 ग्राम ही आया। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने यह उत्पाद कुछ मेडिकल इश्यू के कारण आॅनलाइन खरीदा था। उन्हें इसकी सख्त जरूरत थी। कम वजन के कारण उपभोक्ता समय पर इसका उपभोग नहीं कर सके, इससे उसे असुविधा, शारीरिक कष्ट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

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    सुनाया फैसला

    उपभोक्ता आयोग ने कहा कि विज्ञापन में बताए गए वजन से कम मात्रा में सामान देना ह्लदोषह्व है और यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन तथा अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाएगा। मामले में निर्माता कंपनी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ था। इसलिए उनके खिलाफ एक तरफा फैसला सुनाया गया। वहीं, ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने कहा कि वह केवल एक मध्यस्थ है और उत्पाद की गुणवत्ता या मात्रा की जांच नहीं करता। जिला आयोग ने कंपनी के इस तर्क को माना और केवल निर्माता कंपनी पर जुर्माना लगाया।

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    वहीं, जब मामला राज्य आयोग के पास पहुंचा तो यहां आयोग ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भले ही एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करता हो, लेकिन यदि उसके सामने बार-बार शिकायतें लाई जाती हैं, तो वह पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। इस आधार पर राज्य आयोग ने उपभोक्ता को प्रोडक्ट के डेढ़ हजार रुपए ब्याज सहित देने के अलावा अतिरिक्त 17 हजार रुपए चुकाने के आदेश दिए। बता दें, मामले में उपभोक्ता ने बिल के साथ ही पैक्ड प्रोडक्ट के तौल की तस्वीरें भी आयोग में प्रस्तुत की थीं, इसे आधार बनाकर फैसला सुनाया गया।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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