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भारत-न्यूजीलैंड FTA:एक्सपोर्ट में आएगा बूम, लेदर से लेकर IT तक कई सेक्टर्स को होगा फायदा!

भारत और न्यूजीलैंड के बीच साइन हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किन सेक्टर्स को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा।
एक्सपोर्ट में आएगा बूम, लेदर से लेकर IT तक कई सेक्टर्स को होगा फायदा!
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भारत और न्यूजीलैंड के बीच साइन हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर किन सेक्टर्स को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। यह समझौता सिर्फ व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के एक्सपोर्ट, रोजगार और निवेश के नए दरवाजे खोलने वाला कदम माना जा रहा है।

लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में आएगा बड़ा उछाल

इस FTA का सबसे बड़ा फायदा उन सेक्टर्स को मिलेगा जहां ज्यादा रोजगार पैदा होता है। इसमें लेदर, टेक्सटाइल, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग गुड्स शामिल हैं। अब इन प्रोडक्ट्स को न्यूजीलैंड भेजने पर एक्सपोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी जिससे भारतीय कंपनियां वहां के बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी। खासतौर पर आगरा जैसे शहरों के लेदर एक्सपोर्टर्स को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।

सर्विस सेक्टर के लिए नए मौके

भारत ने इस समझौते के जरिए आईटी, शिक्षा, फाइनेंशियल सर्विसेज और टूरिज्म जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर में बाजार तक पहुंच हासिल की है। सबसे अहम बात यह है कि करीब 5,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स को न्यूजीलैंड में 3 साल तक काम करने का मौका मिलेगा। इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेगा बल्कि भारत की ग्लोबल सर्विस प्रेजेंस भी मजबूत होगी।

निवेश और व्यापार में तेजी का अनुमान

इस एग्रीमेंट के तहत न्यूजीलैंड से भारत में अगले 15 साल में करीब 20 बिलियन डॉलर (लगभग ₹1.8 लाख करोड़) का निवेश आने की उम्मीद जताई गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 1.3 बिलियन डॉलर रहा था जो आने वाले वर्षों में दोगुना होने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.4 बिलियन डॉलर के आसपास है।

कृषि और फूड सेक्टर में सीमित लेकिन अहम असर

न्यूजीलैंड को भारत के बाजार में एंट्री देने के लिए भारत ने करीब 70% टैरिफ लाइन्स खोली हैं। हालांकि सेब, कीवीफ्रूट और मणुका हनी जैसे उत्पादों पर टैरिफ रियायतें सीमित कोटा और न्यूनतम आयात मूल्य के साथ दी गई हैं ताकि घरेलू किसानों पर ज्यादा असर न पड़े। वहीं डेयरी, दाल, चीनी जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।

मेटल और इंडस्ट्रियल सेक्टर को भी फायदा

आयरन, स्टील और एल्युमीनियम स्क्रैप पर लगने वाले टैरिफ को अगले 10 सालों में धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत कम होगी और इंडस्ट्री को मजबूती मिलेगी।

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क्यों खास है यह FTA?

इस समझौते की बातचीत 2010 में शुरू हुई थी जो कई सालों तक रुकी रही। मार्च 2025 में इसे फिर से शुरू किया गया और आखिरकार अब इसे साइन कर लिया गया है। इसमें कुल 20 चैप्टर शामिल हैं जिनमें गुड्स, सर्विसेज, कस्टम प्रोसेस और रूल्स ऑफ ओरिजिन जैसे अहम मुद्दे कवर किए गए हैं।

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क्या बदलेगा आगे?

इस FTA के बाद भारत के लिए ओशिनिया और प्रशांत क्षेत्र के बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी। एक्सपोर्ट बढ़ेगा, निवेश आएगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे। यह समझौता भारतीय कारोबारियों, एक्सपोर्टर्स और प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ा अवसर बनकर सामने आ रहा है।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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