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चीन पर ट्रंप के टैरिफ का असर, भारतीय शर्तों के आगे झुकीं चीनी कंपनियां, माइनॉरिटी स्टेक  पर भी तैयार

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चीन पर ट्रंप के टैरिफ का असर, भारतीय शर्तों के आगे झुकीं चीनी कंपनियां, माइनॉरिटी स्टेक  पर भी तैयार
अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाने के बाद, चीन की कई बड़ी कंपनियों ने भारतीय सरकार की सख्त FDI शर्तों को मानने का मन बना लिया है। इसमें Haier और Shanghai Highly Group जैसी प्रमुख कंपनियां भी शामिल हैं, जो अब भारत में जॉइंट वेंचर  (JV) में माइनॉरिटी  (minority) हिस्सेदारी के लिए भी तैयार हो गई है।

Voltas के साथ Shanghai Highly की वापसी

Shanghai Highly Group, जो चीन की बड़ी कंप्रेसर निर्माता कंपनी है, ने टाटा समूह की Voltas के साथ JV की बातचीत दोबारा शुरू की है। पहले जहां यह कंपनी JV में 60% हिस्सेदारी चाहती थी, अब वह भारतीय नियमों के अनुसार माइनॉरिटी स्टेक और तकनीकी साझेदारी के लिए भी तैयार हो गई है। वहीं कंपनी ने PG Electroplast के साथ भी तकनीकी साझेदारी की है, जिसके तहत वह एयर कंडीशनर कंप्रेसर बनाने की तकनीक शेयर करेगी। यह प्लांट पुणे के पास 350 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है और इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 50 लाख यूनिट होगी।

Haier भारत में बहुमत हिस्सेदारी बेचने को तैयार

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कंपनी Haier, जो भारत में तीसरे स्थान पर है, अब अपनी भारतीय यूनिट में 51-55% हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। पहले कंपनी सिर्फ 26% हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही थी। लेकिन अब वह भारतीय कंपनियों और प्राइवेट इक्विटी फंड्स के साथ बातचीत कर रही है।

PLI स्कीम से मिला बढ़ावा

Bhagwati Products के डायरेक्टर राजेश अग्रवाल के मुताबिक, ‘चीनी कंपनियों का नजरिया पूरी तरह बदल गया है। वे अब JV में माइनॉरिटी स्टेक  या तकनीकी साझेदारी के लिए भी सहज हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत का बड़ा बाजार और PLI (Production Linked Incentive) Scheme इन कंपनियों को आकर्षित कर रही है, जिससे उत्पादन लागत चीन के मुकाबले संतुलित हो सकती है। वहीं इसके साथ भारत सरकार ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी चीनी कंपनी की JV में माइनॉरिटी स्टेक हो, बोर्ड में भारतीय बहुलता हो और नई तकनीक या वैल्यू एडिशन हो, तो उसे मंजूरी मिल सकती है।

प्रेस नोट 3 का असर

2020 में भारत-चीन सीमा विवाद के बाद भारत ने प्रेस नोट 3 लागू किया था, जिसके तहत सीमावर्ती देशों से किसी भी FDI को सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होती है। इस नियम के चलते कई चीनी निवेशों पर रोक लगी थी, लेकिन अब कंपनियां नियमों के तहत भारत में वापसी की कोशिश कर रही हैं। ये भी पढ़ें- गाजियाबाद : कैंसर मरीज ने पहले पत्नी को मारा, फिर कर ली खुदकुशी, सुसाइड नोट में किया चौंका देने वाला खुलासा
Akriti Tiwary
By Akriti Tiwary

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