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सोना-चांदी के बढ़ते भाव का असर : एक साल में प्रदेशभर में 10-15 फीसदी ज्वेलरी दुकानें हुई बंद

सोना-चांदी के रिकॉर्ड भाव अब केवल ग्राहकों की जेब पर ही नहीं, बल्कि छोटे सराफा कारोबारियों के अस्तित्व पर भी असर डाल रहे हैं। बढ़ती कार्यशील पूंजी, घटती ग्राहकी और लगातार बढ़ती कीमतों के कारण प्रदेशभर में पिछले एक साल के दौरान 10 से 15 फीसदी छोटी ज्वेलरी दुकानें बंद हो गई हैं या दूसरे व्यवसायों में चली गई हैं।
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एक साल में प्रदेशभर में 10-15 फीसदी ज्वेलरी दुकानें हुई बंद

अखिल सोनी, इंदौर। सोने-चांदी के बढ़ते भावें ने सराफा कारोबारियों पर भी खासा असर डाला है। आलम यह है कि कई ज्वलेरी की दुकानें बंद हो गईं हैं और दुकानदारों को कोई दूसरा व्यवसाय करना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि छोटे सराफा कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती कार्यशील पूंजी की है। पहले जिस स्टॉक के लिए 50 लाख रुपए की जरूरत होती थी, अब उसी के लिए लगभग तीन गुनी राशि लगानी पड़ रही है। कीमतों में आई तेजी के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के ग्राहकों ने सोने-चांदी की खरीद सीमित कर दी है। 

कब कितना रहे सोना-चांदी के भाव 

           साल                  सोना             चांदी

  • 31 मई 2024     72600 रु.        88700 रु.
  • 31 मई 2025     95900 रु.        97400 रु. 
  • 31 मई 2026    152000 रु.     254000 रु.

         (सोना प्रति 10 ग्राम, चांदी प्रति किलो)

छोटे सराफा कारोबारियों की प्रमुख और ठोस समस्याएं

  • सोना-चांदी महंगा होने से स्टॉक खरीदने के लिए पहले से दोगुनी पूंजी की जरूरत।
  • सीमित पूंजी के कारण पर्याप्त स्टॉक नहीं रख पाते, जिससे बिक्री के अवसर छूट जाते हैं।
  • उधारी पर दिया माल महीनों तक फंसा रहता है, नया स्टॉक नकद में खरीदना पड़ता है।
  • कीमतों में रोजाना उतार-चढ़ाव से खरीद और बिक्री के बीच मार्जिन घट जाता है।
  • ग्राहकों की खरीद क्षमता कम होने से बिक्री और नकदी प्रवाह प्रभावित हुआ है।
  • पुराने ऑर्डर या बुकिंग में बढ़े हुए भाव का नुकसान व्यापारी को उठाना पड़ता है।
  • बिक्री कम होने के बावजूद किराया, वेतन और अन्य स्थायी खर्च पहले जैसे बने हुए हैं।
  • बड़े ब्रांडेड शोरूम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर छोटे व्यापारियों का ग्राहक आधार घट रहा है।
  • महंगा स्टॉक दुकान में लंबे समय तक पड़ा रहने से पूंजी ब्लॉक हो जाती है।
  • मुनाफे का प्रतिशत वही रहने पर भी बिक्री घटने से कुल आय कम हो रही है।

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हमें काफी नुकसान उठाना पड़ रहा

पहले चांदी का छोटा-मोटा सामान बिक जाता था तो खर्च निकल जाता था लेकिन जब से भाव बढ़े हैं छुटपुट ग्राहकी भी बंद हो गई। ग्राहक उधार मांगता है जो अब संभव नहीं है। क्योंकि उधारी सालभर बाद वापस आती है तबतक भाव कई गुना बढ़ जाते हैं और हमें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए हमें इस कारोबार को बंद करना पड़ा। अब हमने आर्टिफिशियल ज्वेलरी का काम शुरु किया है।

मुकुंद सोनी, व्यापारी

हमने ज्वेलरी दुकान बंद कर कपड़े का शोरूम खोला

अगर हमने 2 ग्राम सोने का सामान जिस भाव में बेचा है वह उसी भाव में हम नया तुरंत नहीं खरीद पाएंगे। खरीदारी करने के लिए कम से कम 50 ग्राम का माल लेने जाना पड़ता है। जब तक 50 ग्राम का माल बिकता है और खरीदारी के लिए जाते हैं तब तक भाव न जाने कितने बढ़ जाते हैं। ऐसे में हमें काफी नुकसान होता है। इसलिए हमने कारोबार को बंद कर दिया और उतनी पूंजी में कपड़ों का बढ़ा शोरूम खोल लिया।

आशीष सोनी, व्यापारी

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भाव बढ़े तो ऐसे ही पड़ेगा असर

छोटे कारोबारी समय के साथ अपडेट नहीं हैं और जब से हॉलमार्क शुरु हुआ है तो मुनाफा काफी कम हो गया है। भाव ऐसे ही बढ़ते रहे तो आने-वाले समय में ये आंकड़ा बड़ा भी हो सकता है।

राजा सराफ, अध्यक्ष, मप्र सराफा एसोसिएशन

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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