निगम कर्मचारी बना 'रियल हीरो'चलती सीपीआर देते हुए पहुंचाया अस्पतल

इंदौर। नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ी में शुक्रवार को इंसानियत, हिम्मत और सूझबूझ की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने एक कर्मचारी की जिंदगी बचा ली। ड्यूटी के दौरान गाड़ी चला रहे चालक संजय हिरवे को अचानक हार्ट अटैक आ गया। कुछ ही क्षणों में उनकी हालत गंभीर हो गई और वे वाहन में ही बेसुध हो गए। लेकिन साथ मौजूद निगम कर्मचारी आरिश भुवेल ने घबराने के बजाय साहस दिखाया और तुरंत उन्हें कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देना शुरू कर दिया। उसकी यही सूझबूझ संजय के लिए जीवनदान साबित हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना गौपुर चौराहे के पास हुई। संजय हिरवे रोज की तरह ड्यूटी पर थे और कचरा संग्रहण वाहन चला रहे थे। अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ और कुछ ही देर में वे बेहोश होकर वाहन पर ही लुढ़क गए। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए आरिश भुवेल ने बिना समय गंवाए वाहन रुकवाया और तुरंत सीपीआर देना शुरू कर दिया।
पहले संजय को नजदीकी क्लीनिक ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के बाद हार्ट अटैक की पुष्टि की और तत्काल बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद नगर निगम की गाड़ी सीधे अस्पताल के लिए रवाना हुई। इस दौरान आरिश पूरे रास्ते लगातार संजय के सीने को दबाकर सीपीआर देता रहा, ताकि उनके शरीर में रक्त संचार और सांस की प्रक्रिया बनी रहे।
अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने तत्काल इलाज शुरू किया। डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक के दौरान शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि मरीज को समय पर सही तरीके से सीपीआर मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यदि संजय को रास्ते में सीपीआर नहीं दिया जाता, तो उनकी हालत और गंभीर हो सकती थी।
नगर निगम के कर्मचारियों ने आरिश भुवेल की तत्परता और साहस की जमकर सराहना की। सभी का कहना है कि संकट की घड़ी में उसने जिस धैर्य और समझदारी का परिचय दिया, वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा है। डॉक्टरों की देखरेख में उपचार के बाद संजय हिरवे की हालत में लगातार सुधार हुआ और शनिवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि हार्ट अटैक के दौरान सही समय पर दिया गया सीपीआर किसी व्यक्ति को नई जिंदगी दे सकता है।












