जिंदा मछली ठीक करेगी अस्थमा!हैदराबाद में 8 जून से मिलेगा फिश प्रसादम, लाखों लोगों तकलीफ होती है कम

हैदराबाद। तेलंगाना राज्य में प्रसिद्ध मछली प्रसादम कार्यक्रम एक बार फिर 8 जून को आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन राजधानी हैदराबाद के नामपल्ली प्रदर्शनी मैदान में सुबह 11 बजे शुरू होकर अगले दिन 9 जून सुबह 11 बजे तक चलेगा। परिवहन और आदिवासी कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने बताया कि कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। यह आयोजन हर साल हजारों लोगों को आकर्षित करता है, जो श्वसन समस्याओं से राहत की उम्मीद लेकर यहां आते हैं।
24 घंटे चलेगा पारंपरिक मछली प्रसादम कार्यक्रम
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में हर साल होने वाला चर्चित मछली प्रसादम इस बार 8 जून को आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम शहर के नामपल्ली प्रदर्शनी मैदान में होगा। आयोजन सुबह 11 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 11 बजे तक लगातार 24 घंटे चलेगा। इस दौरान बड़ी संख्या में देश के अलग अलग हिस्सों से लोग पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार की ओर से तैयारियां और व्यवस्थाएं
कार्यक्रम को लेकर राज्य प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और पूरा आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। साथ ही पार्किंग और प्रवेश व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किया जा रहा है ताकि लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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परंपरा और आयोजन का इतिहास
इस कार्यक्रम का संचालन पारंपरिक रूप से बाथिनी गौड़ परिवार द्वारा किया जाता है। यह परिवार वर्षों से इस अनोखे आयोजन को आगे बढ़ा रहा है। बताया जाता है कि इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1845 के आसपास हुई थी और तब से यह कार्यक्रम हर साल आयोजित होता आ रहा है। मछली प्रसादम के तहत एक जीवित मुर्रेल मछली के मुंह में हर्बल पेस्ट रखकर उसे निगलने की परंपरा है। यह पेस्ट विशेष जड़ी बूटियों से तैयार किया जाता है और इसे श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है। मछली प्रसादम न केवल एक धार्मिक और पारंपरिक आयोजन है बल्कि यह तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुका है।
श्रद्धालुओं की आस्था और मान्यताएं
इस कार्यक्रम में आने वाले लोग मानते हैं कि मछली प्रसादम से उन्हें अस्थमा और सांस से जुड़ी बीमारियों में राहत मिलती है। इसी विश्वास के कारण हर साल हजारों की संख्या में मरीज और उनके परिजन यहां पहुंचते हैं। कई लोग इसे एक पारंपरिक और आध्यात्मिक उपचार के रूप में देखते हैं। यह पूरी तरह आस्था पर आधारित प्रथा मानी जाती है और इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण अब तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है।
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विवाद और वैज्ञानिक सवाल
इस परंपरा को लेकर लंबे समय से विवाद भी बना हुआ है। कई स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके प्रभाव पर सवाल उठाए हैं। विशेष रूप से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने अदालत में याचिका दायर कर यह दावा किया था कि हर्बल पेस्ट में भारी धातुएं हो सकती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बिना वैज्ञानिक परीक्षण के किसी भी प्रकार के उपचार पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। इसी कारण इस आयोजन को लेकर लगातार बहस जारी रहती है।











