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Supreme Court:सीजेआई सूर्यकांत ने कॉकरोच और परजीवी वाले बयान पर दी सफाई, 'मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया...

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की 'कॉकरोच' टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया गया और युवाओं के खिलाफ बताया गया। CJI ने साफ किया कि उनका निशाना फर्जी डिग्री के जरिए पेशों में घुसने वाले लोगों पर था।
सीजेआई सूर्यकांत ने कॉकरोच और परजीवी वाले बयान पर दी सफाई, 'मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया...
CJI

CJI ने बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य पेशे में फर्जीवाड़े पर चिंता जताना था। सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की डिग्रियों की जांच पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। पूरा विवाद एक सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी से शुरू हुआ था।

बयान पर दी सफाई

जस्टिस सूर्यकांत ने विवाद बढ़ने के बाद स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया है और इसे युवाओं के खिलाफ बताना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं को लेकर उनके मन में हमेशा सम्मान और गर्व की भावना रही है। उनके अनुसार, देश के युवा ही विकसित भारत की असली ताकत हैं और वे उन्हें प्रेरणा का स्रोत मानते हैं। CJI ने जोर देकर कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी वर्ग को आहत करना नहीं था, बल्कि एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना था। 

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फर्जी डिग्री वाले बयान पर सफाई 

मुख्य न्यायाधीश ने अपने बयान में साफ कहा कि उनका निशाना उन लोगों पर था जो फर्जी और नकली डिग्री के सहारे वकालत जैसे पेशों में प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को सिस्टम के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि ये लोग विभिन्न पेशों में घुसकर उनकी गरिमा को नुकसान पहुंचाते हैं। CJI के अनुसार, यह सिर्फ न्यायिक व्यवस्था का नहीं बल्कि पूरे समाज का गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं और सिस्टम पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। 

क्या था पूरा मामला ?

यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची शामिल थे, एक वकील को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के व्यवहार और सोशल मीडिया गतिविधियों पर सवाल उठाए। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हर व्यक्ति सीनियर एडवोकेट बनने का हकदार नहीं हो सकता। इसी दौरान 'कॉकरोच' जैसी टिप्पणी सामने आई, जिसे लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।

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डिग्रियों की जांच और सख्ती के संकेत

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों की डिग्रियों की प्रमाणिकता को लेकर भी गंभीर चिंता जताई और संकेत दिया कि इस मामले में कड़ी जांच हो सकती है। CJI ने कहा कि कई मामलों में डिग्रियों की सत्यता संदिग्ध है और इस पर केंद्रीय एजेंसियों से जांच कराने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि वहां अपेक्षित सख्ती नहीं दिखती। आखिर में याचिकाकर्ता वकील ने अदालत से माफी मांगते हुए अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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