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‘गरीबी के कारण न्याय पाने से वंचित नहीं हो सकता पति’ :भरण पोषण की राशि जमा न करने पर खारिज हुआ तलाक का मुकदमा

फैमिली कोर्ट ने 2 सितंबर 2024 को भरण पोषण के रूप में हर माह 2 हजार रुपए और 3 सौ रुपए मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए। इस आदेश पर अमीर अली ने आपत्ति की तो कोर्ट ने 50 फीसदी राशि जमा करने के आदेश दिए।
भरण पोषण की राशि जमा न करने पर खारिज हुआ तलाक का मुकदमा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पीपुल्स संवाददाता,जबलपुर। एक अहम फैसले में मप्र उच्च न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया है कि सिर्फ गरीब होने के कारण पति न्याय पाने से वंचित नहीं हो सकता। जस्टिस विवेक कुमार सिंह और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की डिवीजन बेंच ने पत्नी से तलाक पाने को लेकर दायर मुकदमा छतरपुर की फैमिली कोर्ट द्वारा खारिज करने वाले आदेश को निरस्त कर दिया। निचली अदालत ने कहा था कि पति ने भरण पोषण की राशि जमा नहीं की, इसलिए उसके मुकदमे पर आगे सुनवाई नहीं की जा सकती। डिवीजन बेंच ने मुस्लिम कानून के तहत पारित आदेश को अनुचित ठहराते हुए मामले पर फिर से सुनवाई करने के निर्देश दिए।

    हाईकोर्ट में यह मामला छतरपुर के सारणी दरवाजा में रहने वाले अमीर अली की ओर से दाखिल किया गया था। आवेदक का कहना था कि उसका निकाह फरीदा बानो से वर्ष 2006 में मुस्लिम रीति रिवाज से हुआ था। निकाह के बाद हुए विवाद के चलते फरीदा अपने माता-पिता के यहां रहने लगी। अमीर ने फरीदा से तलाक पाने छतरपुर की फैमिली कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया। उस मुकदमे में फरीदा ने भरण पोषण की राशि पाने एक अर्जी दाखिल की।

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    फैमिली कोर्ट ने 2 सितंबर 2024 को भरण पोषण के रूप में हर माह 2 हजार रुपए और 3 सौ रुपए मुकदमा खर्च देने के आदेश दिए। इस आदेश पर अमीर अली ने आपत्ति की तो कोर्ट ने 50 फीसदी राशि जमा करने के आदेश दिए। आवेदक का कहना था कि वह काफी गरीब है और मजदूरी करके अपना गुजारा कर रहा है। ऐसे में वह फरीदा को भरण पोषण और मुकदमा खर्च की राशि नहीं दे सकता। चूंकि अमीर अली ने राशि जमा नहीं की, इस पर उसका मुकदमा 9 मई 2025 को खारिज कर दिया गया। इस पर यह मामला हाईकोर्ट में दाखिल किया गया।

    सुनवाई के दौरान अमीर अली की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र यादव ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद बेंच ने याचिकाकर्ता की आर्थिक स्थिति को देखते हुए निचली अदालत के आदेश को खारिज कर दिया। साथ ही दोनों पक्षों को कहा कि वे 6 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट में हाजिर हों, जहां गुण दोषों के आधार पर तलाक के मुकदमे की आगे कार्रवाई की जाए।

    Aakash Waghmare
    By Aakash Waghmare

    आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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