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सीहोर :करंट पीड़ित किसान के घर पहुंचे मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष ए.पी. सिंह, बोले-दोषी बचेंगे नहीं, मिलेगा न्याय

मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष ए.पी. सिंह ने बड़बेली पहुंचकर करंट पीड़ित किसान सतीश मेवाड़ा से मुलाकात की। निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और उचित मुआवजा दिलाने का भरोसा देते हुए समस्याएं भी सुनीं।
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करंट पीड़ित किसान के घर पहुंचे मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष ए.पी. सिंह

सीहोर। जिले के ग्राम बड़बेली में 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हुए किसान सतीश मेवाड़ा के मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ए.पी. सिंह स्वयं गांव पहुंचे, पीड़ित किसान और उसके परिवार से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली तथा निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित को न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान मौजूद रहे और उन्होंने विद्युत मंडल की लापरवाही से जुड़े कई गंभीर मुद्दे आयोग के समक्ष रखे।

पीड़ित किसान से मिले, हर पहलू की ली जानकारी

मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष ए.पी. सिंह ने पीड़ित किसान सतीश मेवाड़ा से मुलाकात कर हादसे की पूरी जानकारी ली। उन्होंने परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों से भी चर्चा की तथा कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आने पर दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि पीड़ित किसान को न्याय दिलाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी।

लकड़ी का हल भेंट कर उठाई न्याय की मांग

इस अवसर पर किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा ने आयोग अध्यक्ष ए.पी. सिंह का स्वागत करते हुए उन्हें प्रतीक स्वरूप लकड़ी का हल भेंट किया। उन्होंने मांग रखी कि पीड़ित किसान को उचित मुआवजा, सरकारी सहायता और दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने भी एक स्वर में कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद विद्युत मंडल की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ है।

जांच में लापरवाही के संकेत, फिर भी कार्रवाई नहीं

करीब एक माह पहले हुए इस हादसे में किसान सतीश मेवाड़ा का एक हाथ काटना पड़ा, जबकि दूसरा हाथ भी गंभीर रूप से घायल हुआ। घटना के बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, विद्युत मंडल, मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और अन्य अधिकारियों को कई ज्ञापन सौंपे। भोपाल स्थित गोविंदपुरा विद्युत मंडल कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया गया। संभागीय विद्युत निरीक्षक की जांच में अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की गई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक दोषियों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री और प्रभारी मंत्री के निर्देशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर आदेशों का पालन नहीं हुआ।

आयोग ने मांगी रिपोर्ट, महिला आयोग भी सक्रिय

मामले की गंभीरता को देखते हुए मानव अधिकार आयोग ने विद्युत मंडल के प्रबंध संचालक (एमडी) और जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश महिला आयोग ने भी प्रकरण का संज्ञान लेते हुए पीड़ित किसान को ₹25 लाख मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के संबंध में राजस्व आयुक्त, भोपाल से विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। इससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

ग्रामीण बोले-झूलती लाइनें बनीं जानलेवा, हर गांव में खतरा

ग्राम बड़बेली, चंदेरी और आसपास के किसानों ने आयोग अध्यक्ष के सामने बताया कि जिले के सैकड़ों गांवों में 11 केवी की लाइनें और बिजली के खंभे झूलती स्थिति में हैं। कई बार इन्हीं कारणों से खेतों में आग लग जाती है, फसलें जल जाती हैं, पशुओं की करंट लगने से मौत हो जाती है और कई किसानों की जान भी जा चुकी है। इसके बावजूद न तो समय पर मरम्मत होती है और न ही प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिलता है। ग्रामीणों ने रात में बार-बार होने वाली बिजली कटौती का मुद्दा भी उठाया और कहा कि लगातार कई घंटों की बिजली बंद रहने से किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे पूरी रात परेशान रहते हैं। आयोग अध्यक्ष ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की व्यापक जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

पत्रकारिता मेरे लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ को सच और संवेदनशीलता के साथ उठाने का संकल्प ...Read More

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