नई दिल्ली। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को लेकर जारी सस्पेंस अब खत्म हो गया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कर दिया है कि यह रणनीतिक जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं है। ईरान ने अपनी दोस्ती निभाते हुए भारत समेत पांच खास देशों के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का ऐलान किया है। अराघची के इस बयान ने न केवल अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को थोड़ी राहत दी है बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बनी चिंता की लकीरों को भी कम कर दिया है।
ईरानी विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि होर्मुज का रास्ता सिर्फ उन देशों के लिए बंद है जो ईरान के अस्तित्व के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि हम युद्ध की स्थिति में हैं, इसलिए अपने दुश्मनों और उनके सहयोगियों के जहाजों को गुजरने देने का कोई तर्क नहीं बनता। लेकिन उन्होंने उन देशों की लिस्ट भी जारी की जिन्हें ईरान अपना मित्र मानता है। अराघची के मुताबिक भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया गया है। उन्होंने खुलासा किया कि इन देशों ने ईरान से संपर्क कर अपने जहाजों की सुरक्षा की मांग की थी, जिसे तेहरान ने स्वीकार कर लिया है। हाल ही में भारत के दो विशाल जहाजों ने सुरक्षित तरीके से इस क्षेत्र को पार किया है, जो भारत की कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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एक तरफ जहां भारत जैसे मित्रों के लिए ईरान के दरवाजे खुले हैं। वहीं अमेरिका के लिए तेहरान के तेवर बेहद तीखे हैं। अराघची ने उन अफवाहों पर विराम लगा दिया जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच पर्दे के पीछे कोई डील हो रही है। उन्होंने दोटूक कहा कि अमेरिका के साथ हमारी कोई औपचारिक बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करना डिप्लोमेसी या बातचीत नहीं कहलाता। अराघची ने दावा किया कि वॉशिंगटन बार-बार बैकचैनल के जरिए संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ईरान इसे औपचारिक वार्ता नहीं मानता। उनके अनुसार अमेरिका इस संघर्ष में अपने लक्ष्य हासिल करने में बुरी तरह नाकाम रहा है।
ईरान ने यह संदेश भी दुनिया को दे दिया है कि वह कमजोर नहीं है। विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज पर नियंत्रण दिखाकर ईरान ने अपनी ताकत का लोहा मनवा लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान युद्ध को लंबा खींचने का इच्छुक नहीं है लेकिन इसका समाधान तभी होगा जब शर्तें ईरान की होंगी।
1. भविष्य में ईरान पर किसी भी हमले की न होने की गारंटी।
2. युद्ध के दौरान ईरान को हुए आर्थिक और रणनीतिक नुकसान की भरपाई।
3. क्षेत्र में बाहरी ताकतों (विशेषकर अमेरिका) का दखल खत्म होना।
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क्यों महत्वपूर्ण है भारत के लिए यह खबर?
भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह संकरा रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती थीं और सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाती। ईरान का यह फैसला भारत की इकोनॉमी के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। अराघची ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में बांग्लादेश जैसे अन्य सहयोगी देशों के साथ भी इसी तरह का समन्वय किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सेफ पैसेज की नीति न केवल युद्ध के दौरान, बल्कि युद्ध समाप्त होने के बाद भी जारी रहेगी।