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Hormuz Strait:होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर फायरिंग, बढ़ा तनाव

हालात फिर बिगड़ते दिख रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जो थोड़ी राहत की उम्मीद बनी थी, वो अब खत्म होती नजर आ रही है। ईरान ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है और अब खबरें आ रही हैं कि जहाजों पर फायरिंग तक हुई है, जिससे पूरी दुनिया में टेंशन का माहौल बन गया है।
होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर फायरिंग, बढ़ा तनाव

होर्मुज स्ट्रेट में ईरान ने सैन्य नियंत्रण कड़ा कर दिया है और इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की निगरानी में आवाजाही सीमित कर दी गई है। दो जहाजों पर फायरिंग की खबर ने हालात को और गंभीर बना दिया है और ग्लोबल तेल सप्लाई पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है।

होर्मुज पर फिर संकट 

होर्मुज की खाड़ी पर एक बार फिर बड़ा संकट खड़ा हो गया है क्योंकि ईरान ने शनिवार को ऐलान किया कि इस समुद्री रास्ते पर अब फिर से सख्त सैन्य नियंत्रण लागू कर दिया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थिति अब पहले जैसी हो गई है यानी पूरा इलाका फिर से सेना के कड़े नियंत्रण में है। जब तक अमेरिका ईरानी जहाजों पर अपनी पाबंदियां नहीं हटाता तब तक इस खाड़ी पर इसी तरह कंट्रोल रहेगा। इस फैसले के बाद जहाजों की आवाजाही सीमित हो गई है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है। यह कदम सीधे तौर पर बढ़ते तनाव को दिखाता है और हालात को और संवेदनशील बना रहा है।

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जहाजों पर फायरिंग की खबर 

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे चिंताजनक खबर यह सामने आई है कि होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे दो जहाजों पर फायरिंग हुई है। TankerTrackers नाम की समुद्री ट्रैकिंग सेवा के मुताबिक जब ये जहाज इस रास्ते से निकलने की कोशिश कर रहे थे तब उन पर गोलीबारी की गई। यह खबर इसलिए गंभीर है क्योंकि इससे तेल टैंकरों और उनके चालक दल की सुरक्षा पर सीधा खतरा खड़ा हो गया है। इस तरह की घटनाओं न सिर्फ व्यापार पर असर पड़ रहा है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा रहा हैं। 

IRGC से लेनी होगी अनुमति

ईरान के संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने भी साफ कर दिया है कि अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर व्यापारिक जहाज को IRGC की नौसेना से इजाजत लेनी होगी। इसका मतलब साफ है कि बिना अनुमति कोई भी जहाज इस क्षेत्र से नहीं गुजर सकेगा। इस फैसले ने व्यापारिक गतिविधियों को और मुश्किल बना दिया है और शिपिंग कंपनियों के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। पहले जहां इस रास्ते से लगातार आवाजाही होती थी, अब वहां सख्त निगरानी और नियंत्रण लागू हो गया है। इससे तेल सप्लाई चेन पर असर पड़ना तय माना जा रहा है और कई देशों की चिंता बढ़ गई है।

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सीजफायर के बाद जगी थी उम्मीद

बता दें कि 16 अप्रैल को इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर हुआ था जिसमें अमेरिका की भूमिका भी रही थी और इसके बाद ईरान ने थोड़े समय के लिए होर्मुज को खोल दिया था। शनिवार को आठ तेल के जहाजों का एक काफिला इस रास्ते से गुजरता भी नजर आया और कई जहाज मालिकों को उम्मीद जगी कि हालात सामान्य हो रहे हैं। लेकिन इसी दौरान कई जहाज खाड़ी के पास पहुंचकर वापस मुड़ते भी दिखे जिससे साफ हो गया कि रास्ता पूरी तरह सुरक्षित नहीं था। 

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...

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