पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर बेहद गंभीर हो गए हैं। दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी आज से लागू करने की घोषणा की है। यह कार्रवाई भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से प्रभावी होगी। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से होकर अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति के निर्देशों के अनुसार की जा रही है। बयान में कहा गया है कि ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले सभी समुद्री जहाजों पर समान रूप से रोक लागू की जाएगी। इस नाकेबंदी के दायरे में ईरान के तटीय क्षेत्र, अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के आसपास के बंदरगाह भी शामिल होंगे। हालांकि अमेरिकी सेना ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी।
अमेरिकी सेना ने समुद्री मार्गों पर चल रहे जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। नाविकों से कहा गया है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें और किसी भी आपात स्थिति में नौसैनिक चैनलों के जरिए संपर्क करें। इस कदम के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने भी स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है, क्योंकि होर्मुज़ स्ट्रेट वैश्विक व्यापार का बेहद संवेदनशील मार्ग माना जाता है।
रविवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू कर देगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन जहाजों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा, जो उनके मुताबिक 'अवैध टोल' का भुगतान कर रहे हैं। कुछ घंटों बाद, अमेरिकी सेना ने कहा कि वह सोमवार को भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से इस नाकेबंदी को लागू करना शुरू कर देगी।
इस नाकेबंदी के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर विवाद चल रहा है, और अब इस कदम ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ईरान की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अमेरिका का यह कदम सिर्फ सुरक्षा या नाकेबंदी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसके पीछे एक आर्थिक वजह भी बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते से गुजरने वाले कुछ जहाज अब तेल और व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर की जगह चीनी मुद्रा युआन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे अमेरिका के पुराने पेट्रोडॉलर सिस्टम के लिए चुनौती माना जाता है, जिसमें दुनिया का तेल अधिकतर डॉलर में खरीदा-बेचा जाता है। साथ ही इसे यह भी माना जा रहा है कि कुछ देश अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों से बचने के लिए युआन का इस्तेमाल कर रहे हैं।