तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्ते एक बार फिर तल्ख होते नजर आ रहे हैं। जहां एक तरफ बातचीत की कोशिशों की खबरें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों देशों के बयान हालात को और जटिल बना रहे हैं। ईरान ने साफ तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह बातचीत के नाम पर दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाना चाहता है।
ईरान की ओर से कड़ा बयान सामने आया है। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि अमेरिका शुरू से ही ईमानदारी से बातचीत नहीं करना चाहता।
अयोध्या में दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका का असली मकसद बातचीत नहीं, बल्कि ताकत के जरिए अपनी शर्तें लागू करना है। इलाही ने यह भी सवाल उठाया कि एक तरफ अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की बात करता है, लेकिन दूसरी तरफ उसी इलाके में नाकाबंदी जैसी स्थिति पैदा कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि ईरान युद्ध के पक्ष में नहीं है और हमेशा शांति चाहता है, लेकिन अमेरिका का रवैया तनाव बढ़ाने वाला है।
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तनाव के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर इस हफ्ते दूसरी बैठक हो सकती है। बताया जा रहा है कि दोनों देश आमने-सामने बैठकर समाधान निकालने की कोशिश करेंगे, ताकि बढ़ते टकराव को रोका जा सके। इस बैठक के लिए इस्लामाबाद और जेनेवा को संभावित जगह माना जा रहा है, हालांकि अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
इससे पहले 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई पहली बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी, जिससे बातचीत की राह आसान नहीं दिख रही।
इस पूरे तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, मार्च महीने में रूस की तेल से होने वाली कमाई लगभग दोगुनी होकर 19 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
रूस का तेल निर्यात बढ़कर करीब 7.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है, जो पिछले महीने से काफी ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और सप्लाई को लेकर चिंता की वजह से तेल की कीमतें बढ़ीं, जिसका सीधा फायदा रूस को मिला।
हालांकि बढ़ती कीमतों के बीच एक चिंता भी सामने आई है। IEA ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल की मांग में दूसरी तिमाही में बड़ी गिरावट आ सकती है। यह गिरावट कोविड महामारी के बाद सबसे ज्यादा हो सकती है, क्योंकि महंगे तेल की वजह से कई देश और उद्योग खपत कम करने पर मजबूर हो सकते हैं।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि दुनिया को ताकतवर जो चाहे वही करे जैसे हालात में नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र के नियमों और कानूनों के आधार पर ही चलनी चाहिए। उनके इस बयान को मिडिल ईस्ट के मौजूदा तनाव के संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है।