संघ प्रमुख रहे सुदर्शन का ड्रीम प्रोजेक्ट हिंदी विश्वविद्यालय ने किया बंद :जोर-शोर से शुरू हुआ था ''गर्भ संस्कार'' पाठ्यक्रम, बदहाली के दौर में हिंदी विवि

जनसंघ-भाजपा के संस्थापक रहे देश के पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर भोपाल में शुरू हुए अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय स्वयं स्टाफ क्राइसिस व अन्य समस्याओं के चलते बदहाली के दौर में है। हालत यह है कि इन दिनों विवि में स्नातकोत्तर कक्षाओं की परीक्षाएं क्लर्क और भृत्य के भरोसे हो रही हैं।
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जोर-शोर से शुरू हुआ था ''गर्भ संस्कार'' पाठ्यक्रम, बदहाली के दौर में हिंदी विवि

राजीव सोनी, भोपाल। अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय भोपाल में सनातन और भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन और वैज्ञानिक अनुसंधान संबंधी संस्कार कक्षाएं बमुश्किल चार साल ही चल पाईं। 2018-19 के बाद से यह नवाचार बंद हो गया। आरएसएस के सर संघचालक रहे केएस सुदर्शन (अब दिवंगत) के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को मप्र सरकार ने हिंदी विवि में बड़ी उम्मीदों से शुरू किया था। षोडश संस्कारों में खासतौर पर  ''गर्भ संस्कार '' को वैज्ञानिक व सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सिखाने के लिए यह पाठ्यक्रम शुरू हुआ था। महाभारत कालीन  ''अभिमन्यु ''की तर्ज पर गर्भ में पल रहे शिशुओं को स्वस्थ, संस्कारवान और मेधावी बनाने का यह प्रयोग फेल हो गया। 

संघ प्रमुख के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार ने बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू किया था। इसके लिए गांधीनगर गुजरात की चाइल्ड यूनिवर्सिटी से एमओयू भी किया गया था। उस वक्त गर्भ संस्कार तपोवन केंद्र ने  ''गर्भ संवाद '' के जरिए स्वस्थ और बुद्धिमान शिशुओं के जन्म का दावा किया था। लेकिन चार साल बाद ही गर्भवती महिलाओं की शिक्षा-दीक्षा संबंधी  ''गर्भ संस्कार '' का यह प्रयोग बंद हो गया। भारतीय ज्ञान परंपराओं पर केंद्रित ये संस्कार कक्षाएं और पाठ्यक्रम बंद करने पड़े। 

तीन घंटे की क्लास में योग-संगीत और ध्यान

इस प्रयोग का मक़सद गर्भ में पल रहे बच्चे पर  ''संस्कारों और शौर्य गाथाओं '' का असर देखना था। गर्भवती महिलाओं के लिए नौ महीने के इस पाठ्यक्रम और नवाचार के तहत हर दिन 3 घंटे की क्लास लगाई जाती थीं। इन कक्षाओं में गर्भवती महिलाओं को भारतीय संस्कार, योग-ध्यान, मंत्र, प्रार्थना, गर्भ संवाद और संगीत के जरिए शिक्षा दी जाती थी। 

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पीजी परीक्षाओं में क्लर्क और भृत्य की ड्यूटी!

जनसंघ-भाजपा के संस्थापक रहे देश के पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर भोपाल में शुरू हुए अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय स्वयं स्टाफ क्राइसिस व अन्य समस्याओं के चलते बदहाली के दौर में है। हालत यह है कि इन दिनों विवि में स्नातकोत्तर कक्षाओं की परीक्षाएं क्लर्क और भृत्य के भरोसे हो रही हैं। संचालन(इनविजिलेशन) के लिए क्लर्क और भृत्यों की ड्यूटी लगाई गई है जबकि प्रेक्टिकल के लिए पृथक किए गए गेस्ट फैकल्टी को बिना सेवा में लिए ही मदद करने को कहा जा रहा है। 

गेस्ट फैकल्टी सेवा से पृथक 

विश्वविद्यालय ने करीब 24 गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं डेढ़ महीने पहले  ''ब्रेक '' (पृथक) कर दी है। पिछले 10-12 साल से गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं 3 दिन का ब्रेक देकर शुरू कर दी जाती थीं। लेकिन इस बार डेढ़ महीने बाद भी प्रबंधन ने उनहें बहाल नहीं किया। अब 13 रेगुलर फैकल्टी के भरोसे ही व्यवस्थाएं चलाई जा रहीं हैं। 

यूनिवर्सिटी कैंपस दूर होने से बंद हो गए संस्कार पाठ्यक्रम

-यूनिवर्सिटी कैंपस शहर से दूर (सूखी सेवनिया) शिफ्ट हो जाने के कारण संस्कार कक्षाएं(गर्भ संस्कार) बंद हो गईं। पुरानी बिल्डिंग में यह कक्षाएं संचालित थीं। जहां तक गेस्ट फैकल्टी का सवाल है तो शैक्षणिक कार्य बंद होने के कारण सेवाएं पृथक की गईं हैं। परीक्षाओं में क्वालीफाइड स्टाफ की ड्यूटी लगाते हैं। - देव आनंद हिंडोलिया, कुलगुरु अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय,  भोपाल

Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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