Peoples Update Special :मध्यप्रदेश में GIS-2027 की तैयारी शुरू, इंदौर-भोपाल पर सबसे ज्यादा फोकस

अशोक गौतम, भोपाल। समिट से पहले औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, नई औद्योगिक नीति, निवेशकों को बेहतर सुविधाएं और औद्योगिक क्षेत्रों के पास आवासीय योजनाओं पर तेजी से काम किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य निवेशकों को बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराकर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देना है।
भोपाल में हो सकती है GIS-2027 की मेजबानी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दो दिवसीय समिट के 5 जनवरी 2027 से भोपाल में आयोजित होने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके उद्घाटन के लिए आ सकते हैं। आयोजन स्थल के रूप में जंबूरी मैदान, सतगढ़ी औद्योगिक क्षेत्र, कलियासोत डैम के सामने का क्षेत्र और लाल परेड ग्राउंड पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, शहर के बीच स्थित होने और अधिक भीड़भाड़ के कारण लाल परेड ग्राउंड को अंतिम विकल्प के रूप में रखा गया है।
आठ महीने में विकसित होंगे औद्योगिक क्षेत्र
समिट से पहले मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) ने अविकसित औद्योगिक भूखंडों और क्षेत्रों को विकसित करने के लिए आठ माह का लक्ष्य तय किया है। इसके तहत प्लॉटिंग, सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निवेशकों की मांग को देखते हुए भोपाल, इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर के औद्योगिक क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। साथ ही भोपाल के सतगढ़ी सहित आसपास के क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्षेत्रों की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
औद्योगिक नीति में संशोधन की तैयारी
राज्य सरकार औद्योगिक नीति में संशोधन पर विचार कर रही है। मौजूदा नीति की कमियों को दूर करने के लिए उद्योग जगत से सुझाव लिए जाएंगे। संशोधित नीति का उद्देश्य वर्तमान उद्योगों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना होगा। निकायों और पंचायतों के विभिन्न करों में राहत देने के प्रस्ताव पर भी मंथन चल रहा है। सरकार निवेशकों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
औद्योगिक क्षेत्रों के पास बनेंगी आवासीय योजनाएं
सरकार औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास आवासीय योजनाएं भी विकसित करेगी। इससे उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों और तकनीशियनों को शहर तक रोजाना आने-जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कामकाजी महिलाओं के लिए विशेष आवासीय सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन योजनाओं में स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे उद्योगों के साथ सामाजिक अधोसंरचना भी मजबूत होगी।
इन औद्योगिक क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
जीआईएस-2027 के तहत भोपाल के निकट सतगढ़ी औद्योगिक क्षेत्र, इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, ग्वालियर का टेलीकॉम पार्क, सागर का नया औद्योगिक क्षेत्र मसवासी (गल्ला मंडी के पास), जो राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर स्थित है, और उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी एक्सटेंशन परियोजना पर विशेष फोकस रहेगा। फैक्ट फाइल के अनुसार प्रदेश में 20 हजार हेक्टेयर अविकसित औद्योगिक भूमि, 28 हजार हेक्टेयर विकसित हो रही भूमि और 15 हजार हेक्टेयर विकसित भूमि उपलब्ध है।
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एमपीआईडीसी और उद्योग जगत ने कही यह बात
एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक चंद्रमौली शुक्ला ने बताया कि जीआईएस-2027 की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोजन स्थल के चयन की प्रक्रिया जारी है और औद्योगिक क्षेत्रों को तेजी से विकसित किया जा रहा है, ताकि निवेशकों को बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराई जा सके। वहीं गोविंदपुर औद्योगिक एसोसिएशन के विजय गौर ने कहा कि सरकार उद्योगों को आकर्षित करने के लिए लगातार नीतिगत सुधार कर रही है। इसी का परिणाम है कि पिछले दो वर्षों में कई बड़े निवेशकों ने मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित किए हैं तथा पीएम मित्र पार्क और मोहासा-बाबई जैसे औद्योगिक क्षेत्र लगभग पूरी तरह आवंटित हो चुके हैं।












