IMF के मुताबिक भारत की जीडीपी 2026 में 6.5 फीसदी की दर से बढ़ सकती है, जो घरेलू मांग की मजबूती और बेहतर आर्थिक प्रदर्शन का संकेत है, हालांकि वैश्विक स्तर पर चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
IMF ने भारत के विकास अनुमान में 30 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 6.5 प्रतिशत कर दिया है यह संशोधन पिछले साल के मुकाबले बेहतर आर्थिक प्रदर्शन और लगातार मजबूत बनी हुई विकास गति को देखते हुए किया गया है रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2025 में उम्मीद से बेहतर ग्रोथ दिखाई है जिसका असर आने वाले वर्षों के अनुमान पर भी पड़ा है इसके साथ ही बाहरी दबावों में कुछ कमी जैसे टैरिफ में राहत ने भी इस सुधार में भूमिका निभाई है यह संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी स्थिर और लचीली बनी हुई है।
IMF ने साफ तौर पर कहा है कि भारत की मजबूत घरेलू मांग इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है देश के अंदर खपत और निवेश में स्थिरता बनी हुई है जिससे आर्थिक गतिविधियों को लगातार समर्थन मिल रहा है इसके अलावा सरकारी नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च ने भी ग्रोथ को गति दी है वैश्विक दबावों के बावजूद भारत का प्रदर्शन उभरते एशियाई देशों की तुलना में बेहतर बना हुआ है यही कारण है कि भारत को क्षेत्रीय विकास का प्रमुख इंजन माना जा रहा है।
IMF का अनुमान है कि 2027 में भी भारत की विकास दर 6.5 प्रतिशत के आसपास बनी रह सकती है इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में तेज उछाल के बजाय स्थिर ग्रोथ देखने को मिलेगी यह स्थिति एक संतुलित अर्थव्यवस्था की ओर इशारा करती है जहां अत्यधिक उतार-चढ़ाव की संभावना कम होती है हालांकि इसके लिए जरूरी होगा कि घरेलू और वैश्विक दोनों स्तर पर संतुलन बना रहे और नीतिगत फैसले समय पर लिए जाएं ताकि ग्रोथ की यह रफ्तार कायम रह सके।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक दबाव विकास के लिए चुनौती बने हुए हैं इन परिस्थितियों का असर व्यापार, ऊर्जा कीमतों और वित्तीय स्थितियों पर पड़ रहा है खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में इसका असर ज्यादा देखने को मिल रहा है पर्यटन और बाहरी निवेश पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है हालांकि भारत इन चुनौतियों के बीच भी अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है लेकिन वैश्विक अनिश्चितता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
IMF के अनुसार उभरते और विकासशील एशियाई देशों की ग्रोथ दर में गिरावट का अनुमान है जहां 2025 में 5.5 प्रतिशत रहने के बाद यह 2026 में घटकर 4.9 प्रतिशत हो सकती है वहीं भारत इस क्षेत्र में सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले देशों में बना हुआ है कई देशों में घरेलू मांग कमजोर पड़ रही है और बाहरी दबाव बढ़ रहे हैं इसके विपरीत भारत की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित है यही वजह है कि भारत को एशिया की विकास यात्रा का मुख्य चालक माना जा रहा है हालांकि IMF ने चेतावनी भी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट आगे भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।