अशोक गौतम, भोपाल। सिंहस्थ में जबलपुर, सागर सहित अन्य मप्र के पूर्वी क्षेत्रों और इससे लगे हुए अन्य राज्यों के ट्रैफिक को आसानी से उज्जैन तक पहुंचाने के लिए सरकार ने भोपाल-इंदौर ग्रीन फील्ड और भोपाल-देवास चौड़ीकरण की कार्ययोजना तैयार की थी। दोनों की परियोजनाएं अभी फाइनल नहीं हो पाई हैं। इन परियोजनाओं की स्वीकृति मिलने और राशि जारी करने में करीब एक साल का समय लग सकता है। ऐसे में ये सड़कें सिंहस्थ के उपयोग के लिए तैयार नहीं हो पाएंगी।
भोपाल-इंदौर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे : इस हाइवे का एलाइन्मेंट अभी तक फाइनल नहीं हो पाया है। बीते 7 माह से इसकी एलाइन्मेंट पर तमाम अध्ययन और उनकी रिपोर्ट आने में देरी के कारण यह प्रोजेक्ट पिछड़ रहा है। परियोजना के लिए वन पर्यावरण की अनुमति लेने में समय लगेगा। इधर किसानों की जमीन अधिग्रहण करने में एक साल का समय लगेगा। इसकी स्वीकृति मिलने और राशि जारी होने में करीब दो साल का समय लग सकता है।
इस हाइवे में वर्तमान समय पर सबसे ज्यादा ट्रॉफिक है। ट्रैफिक के दबाव को नहीं झेल पा रही है। सबसे ज्यादा इसी हाइवे में एक्सिडेंट भी होते हैं। वर्तमान कंपनी को सरकार ने वर्ष 2037 तक का ठेका दिया है। इससे अनुबंध निरस्त करने में तकनीकी पेंच आ रहा है। चौड़ीकरण के साथ ब्लैक स्पॉट समाप्त करने के लिए इसमें 11 फ्लाई ओवर और अंडर पास बनाने का प्रस्ताव है।
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उज्जैन में सिंहस्थ अप्रैल 2028 में प्रस्तावित है। उज्जैन से जुड़े कार्यों की डेट लाइन सीएम डॉ. मोहन यादव में दिसम्बर 2027 रखी है। अब विकास विभाग और निर्माण कर रही एजेंसियों के पास परियोजनाओं को फाइनल करने के लिए सिर्फ 6 माह का समय और बचा है। इस वर्ष बारिश के बाद एजेंसियों को युद्ध स्तर पर काम करना पड़ेगा।
भोपाल-देवास चौड़ीकरण का प्रस्ताव है, लेकिन इसमें हाइवे निर्माण कंपनी के अनुबंध के संबंध में पेंच आ रहा है। इस संबंध में कंपनी के अधिकारियों से बातचीत ल रही है। फिलहाल इसके सुधार और मरम्मत के लिए सौ करोड़ का काम करा रही है। -भरत यादव, एमडी एमपीआरडीसी
भोपाल-देवास फोर लेन है, लेकिन हाइवे में पिछले दस वर्षों से ट्रैफिक का दबाव बढ़ गया है। इसे अब 6 लेन और कई जगह ओवर ब्रिज और अंडर पास भी बनाने की जरूरत है। रोड के किनारे अब धीरे धीरे बसाहट बढ़ती जा रही है। इस रोड को चौड़ीकरण नहीं किया गया तो सिंहस्थ में ट्रैफिक मैनेजमेंट करने में दिक्कत आएगी। -बीपी पटेल, सेवानिवृत्त, चीफ इंजीनियर
मेरे पैरेंट्स भोपाल में रहते हैं और मैं इंदौर में एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करता हूं। मैं पिछले दस साल से भोपाल हर हफ्ते आना जाना करता हूं। पिछले पांच वर्ष से इस हाइवे में बहुत ट्रैफिक हो गया है। सड़क हादसे भी बहुत होते हैं। दोनों तरफ से इस हाइवे को चौड़ीकरण करने की जरूरत है।
-अभिनव मंगल, निवासी, इंदौर
भोपाल-इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे के लिए एलाइन्मेंट सर्वे और अध्ययन चल रहा है। इसमें अभी समय लगेगा। सर्वे रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार इस हाइवे को बनाने के संबंध में निर्णय लेगी।
एसके सिंह, आरओ, एनएचएआई, मप्र