आजकल लोग गेहूं की रोटी के बजाय मल्टीग्रेन आटे की रोटी ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसे न्यूट्रिशन का पावरहाउस माना जाता है, क्योंकि इसमें अलग-अलग अनाज मिलाए जाते हैं। लेकिन अगर इसका मिश्रण सही तरीके से न किया जाए, तो इसके फायदे कम हो सकते हैं और नुकसान भी हो सकता है।
मल्टीग्रेन आटे का मकसद शरीर को फाइबर, प्रोटीन और विटामिन्स देना होता है। लेकिन कई लोग इसमें 5-6 तरह के अनाज एक साथ मिला देते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, बहुत ज्यादा वैरायटी होने से शरीर सभी पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता। इससे डाइजेशन की समस्या, गैस और पेट में भारीपन हो सकता है।
प्रोटीन बढ़ाने के लिए लोग आटे में ज्यादा मात्रा में सोयाबीन या चना मिला लेते हैं। हालांकि ये सेहतमंद हैं, लेकिन अधिक मात्रा में इस्तेमाल से रोटी कड़क और स्वाद में कड़वी हो सकती है। आयुर्वेद और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, चने की मात्रा कुल आटे का 10–15% ही होनी चाहिए। ज्यादा मात्रा में दालें मिलाने से यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या भी हो सकती है।
बाजरा और मक्का सर्दियों में फायदेमंद होते हैं, लेकिन इनकी तासीर गर्म होती है। गर्मी के मौसम में इनका ज्यादा इस्तेमाल पेट की गर्मी और स्किन एलर्जी का कारण बन सकता है। इसलिए मौसम और अपनी पाचन क्षमता के अनुसार ही इन अनाजों को मिलाना चाहिए।
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मल्टीग्रेन आटे में ओट्स या सत्तू मिलाना सही नहीं माना जाता। इनकी शेल्फ लाइफ अलग होती है, जिससे आटा जल्दी खराब हो सकता है। अगर आटे में नमी आ जाती है, तो उसकी क्वालिटी और रोटी का स्वाद दोनों खराब हो जाते हैं।
कुछ लोग आटा पिसवाते समय ही उसमें नमक या तेल मिला देते हैं, ताकि रोटियां नरम बनें। लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। नमक मिलाने से आटे के प्राकृतिक गुण प्रभावित होते हैं और यह जल्दी खराब हो जाता है। वहीं तेल या घी मिलाने से आटे में अजीब गंध आ सकती है।
मल्टीग्रेन आटा सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है, लेकिन तभी जब इसे सही तरीके से तैयार किया जाए। सही मिश्रण और संतुलन बनाए रखकर ही आप इसके पूरे पोषण लाभ ले सकते हैं।