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PU Special :ऑर्गन डोनेशन डे विशेष: हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों ने सुनाई नई जिंदगी की कहानी, कहा- यह दिन हमारे लिए दूसरा जन्म

ऑर्गन डोनेशन डे के अवसर पर यह विशेष लेख उन मरीजों की दिल छू लेने वाली कहानियाँ प्रस्तुत करता है जिन्होंने हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद नया जीवन पाया है। वे इस दिन को अपना दूसरा जन्म बताते हैं।
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ऑर्गन डोनेशन डे विशेष: हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों ने सुनाई नई जिंदगी की कहानी, कहा- यह दिन हमारे लिए दूसरा जन्म
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प्रवीण श्रीवास्तव, भोपाल। कभी धड़कनों का अनियमित होना डराता था, कभी कुछ कदम चलने पर सांस फूल जाती थी। जिंदगी धीरे-धीरे मुश्किल होती जा रही थी और हर पल यह डर बना रहता था कि पता नहीं अगली सांस आएगी भी या नहीं। ऐसे समय में हार्ट ट्रांसप्लांट ने इन मरीजों को सिर्फ नया दिल नहीं दिया बल्कि जिंदगी को दोबारा जीने का मौका भी दिया। ऑर्गन डोनेशन डे के मौके पर पीपुल्स समाचार ने हार्ट ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों से बातचीत की। मरीजों ने बताया कि ट्रांसप्लांट के पहले का समय उनके लिए कितना मुश्किल था और नया दिल मिलने के बाद उनकी जिंदगी किस तरह बदल गई। किसी के लिए बेटी के साथ जिंदगी बिताने की उम्मीद वापस आई तो किसी ने ट्रांसप्लांट के दिन को ही अपना दूसरा जन्मदिन मान लिया।

बेटी के साथ जीने के लिए मुझे जिंदगी दोबारा मिली

रितु सिंह, उम्र 26 साल | नया जन्मदिन: 25 अप्रैल 2025

रितु सिंह के लिए सबसे बड़ा डर अपनी मौत का नहीं बल्कि अपनी छोटी बेटी के भविष्य का था। वह बार-बार सोचती थीं कि अगर उन्हें कुछ हो गया तो उनकी बेटी का क्या होगा।

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बेटी के जन्म के बाद से ही उनकी धड़कन अनियमित रहने लगी थी। जांच में सामने आया कि उनका हार्ट 25 फीसदी से भी कम काम कर रहा था। इलाज के लिए एम्स में जांच कराई गई तो डॉक्टरों ने हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई। रितु बताती हैं कि किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट के बारे में तो उन्होंने सुना था लेकिन हार्ट ट्रांसप्लांट की बात ने पूरे परिवार को डरा दिया था। हालांकि एम्स के डॉक्टरों ने उन्हें हिम्मत दी और इलाज के लिए तैयार किया। ट्रांसप्लांट के बाद अब रितु अपनी बेटी के साथ सामान्य जिंदगी जी रही हैं। वह कहती हैं कि अब वह अपनी बेटी को पहले से ज्यादा समय दे पा रही हैं। हालांकि जिंदगी में सावधानी अभी भी जरूरी है। रितु के मन में उस परिवार के लिए गहरी भावनाएं हैं, जिसके प्रियजन के अंगदान से उन्हें नया जीवन मिला। वह कहती हैं कि कई बार उनके मन में इच्छा होती है कि वह उस मां से मिलें, जिसके बेटे का दिल आज उनके भीतर धड़क रहा है।

हर धड़कन याद दिलाती है कि मुझे दूसरी जिंदगी मिली है

दिनेश मालवीय, उम्र 55 साल | नया जन्मदिन: 23 जनवरी 2025

दिनेश मालवीय के लिए भी एक समय ऐसा था जब उन्हें लगता था कि उनकी जिंदगी खत्म होने वाली है।

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लंबे समय से दिल की समस्या से जूझ रहे दिनेश को कुछ कदम चलने पर ही सांस फूलने लगती थी। एम्स में जांच के बाद पता चला कि उनका हार्ट धीरे-धीरे काम करना बंद कर रहा है। डॉक्टरों ने हार्ट ट्रांसप्लांट की सलाह दी। दिनेश बताते हैं कि ट्रांसप्लांट को लेकर डर तो था लेकिन उनके सामने विकल्प भी साफ था। अगर ट्रांसप्लांट नहीं होता तो जिंदगी खतरे में थी। जिस दिन उन्हें नया दिल मिला, वह दिन उनके लिए महज अस्पताल में इलाज की तारीख नहीं है। वह इसे अपनी जिंदगी का दूसरा जन्म मानते हैं। आज दिनेश सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। उनका कहना है कि हर धड़कन उन्हें यह याद दिलाती है कि उन्हें दूसरी जिंदगी मिली है। जिस परिवार ने अपने प्रियजन के अंगदान का फैसला लिया, उसके प्रति उनके मन में सिर्फ धन्यवाद नहीं बल्कि गहरा अपनापन है।

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देश में बढ़ रहे अंग प्रत्यारोपण, लेकिन हार्ट ट्रांसप्लांट अभी भी सीमित

अंगदान और अंग प्रत्यारोपण को लेकर देश में लगातार जागरूकता बढ़ रही है। उपलब्ध 2024 के NOTTO आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल 18,911 अंग प्रत्यारोपण हुए। इनमें 3,403 प्रत्यारोपण मृतक दाताओं से मिले अंगों के जरिए किए गए। इसी अवधि में देशभर में 205 हार्ट ट्रांसप्लांट हुए। मध्यप्रदेश की बात करें तो उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 4 हार्ट ट्रांसप्लांट किए गए। आंकड़े बताते हैं कि देश में अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था आगे बढ़ रही है, लेकिन हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत और उपलब्धता के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद जिंदगी में सावधानी भी जरूरी

हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीजों के लिए नियमित देखभाल बेहद जरूरी होती है। ट्रांसप्लांट के बाद शरीर नए अंग को अस्वीकार न करे, इसके लिए इम्यूनोसप्रेशन दवाओं का इस्तेमाल आमतौर पर लंबे समय तक, कई मामलों में जिंदगीभर करना पड़ता है। इन दवाओं के कारण संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। डॉक्टरों की सलाह के अनुसार दवाओं को नियमित रूप से लेना जरूरी है। इन्हें अपनी मर्जी से बंद करना या खुराक में बदलाव करना खतरनाक हो सकता है। ट्रांसप्लांट के बाद नियमित मेडिकल फॉलोअप और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जीवनशैली अपनाना भी महत्वपूर्ण है।

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एक अंगदान, किसी की पूरी जिंदगी बदल सकता है

रितु और दिनेश की कहानियां सिर्फ दो मरीजों की कहानी नहीं हैं। ये उन परिवारों के फैसले की अहमियत भी बताती हैं, जिन्होंने अपने प्रियजन को खोने के बेहद मुश्किल समय में अंगदान का निर्णय लिया। एक व्यक्ति की जिंदगी खत्म होने के बाद उसके अंग किसी दूसरे व्यक्ति के लिए नई जिंदगी की वजह बन सकते हैं। यही वजह है कि अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इन मरीजों के लिए नया दिल सिर्फ एक मेडिकल ट्रांसप्लांट नहीं, बल्कि जिंदगी को फिर से शुरू करने का मौका है।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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