हरदा में नार्मदीय ब्राह्मण समाज की धर्मशाला के 100 साल पूरे, दो दिवसीय शताब्दी समारोह का आयोजन

हरदा। जिले की प्रतिष्ठित नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर समाज की ओर से दो दिवसीय शताब्दी समारोह आयोजित किया जा रहा है। समारोह के दौरान धर्मशाला की नींव रखने वाले समाजसेवियों के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि और सम्मान अर्पित किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य समाज की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
400 रुपए में खरीदी गई थी जमीन
नार्मदीय ब्राह्मण समाज मंदिर ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी अशोक पाराशर ने बताया कि करीब 100 वर्ष पहले गुलाम भारत में सामाजिक एकता और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों के लिए धर्मशाला की स्थापना का विचार सामने आया था। 13 संस्थापक सदस्यों ने मिलकर इस दिशा में पहल की। स्व. गंगाविशन सदाशिव गुहा ने करीब 0.51 डिसमिल जमीन केवल 400 रुपए में समाज को उपलब्ध कराई थी। इसके बाद समाज के सक्रिय सदस्यों ने धर्मशाला की नींव रखी।
1921 में आया था धर्मशाला निर्माण का प्रस्ताव
समाज के वयोवृद्ध मधुकर बिल्लौरे के अनुसार, नार्मदीय ब्राह्मण समाज धर्मशाला जिले की सबसे पुरानी धर्मशालाओं में शामिल है और इसका लिखित रिकॉर्ड समाज के पास उपलब्ध है। वर्ष 1921 में सेठ स्व. गणेशदास बलवटे के आतिथ्य में बलवटे परिसर में आयोजित समाज के पहले सम्मेलन में धर्मशाला निर्माण का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद 22 सितंबर 1926 को धर्मशाला की औपचारिक स्थापना हुई।
13 संस्थापकों को किया जा रहा याद
शताब्दी समारोह के संयोजक संदीप पाराशर ने बताया कि धर्मशाला की स्थापना में 13 समाजसेवियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनमें स्व. रामेश्वरदास गार्गव, स्व. जगन्नाथ गुहा कडोला, स्व. मुंशी दामोदर प्रसाद पाराशर, स्व. ताराचंद दीवान बंडावाला, स्व. सीताराम दीवान पानतलाई, स्व. बाबू नाथुराम बिल्लौरे तजपुरावाले, स्व. लक्ष्मीनारायण निलोबा सराफ, स्व. मुंशी लच्छीराम सवालनवीस, स्व. कुंजीलाल नांदरा, स्व. हरलाल खजांची पानतलाई, स्व. गुलाबचंद बजाज, स्व. रामकरण लाल जोशी नागपुर और स्व. नाथूराम धनेसर खिड़कीवाला शामिल थे।
23 सितंबर को होंगे कई कार्यक्रम
23 सितंबर को गोपीकृष्ण गार्डन में सुबह पंजीयन के बाद स्मारिका ‘आराध्या-एक अनमोल विरासत’ का लोकार्पण किया जाएगा। इसके बाद मंथन और संकल्प सत्र आयोजित होंगे। अंत में सम्मान एवं समापन कार्यक्रम होगा।




















